Monday, 23rd October, 2017

मोबाइल सिग्नल ढूंढने निकले अंकल जी को हुए प्रभु के दर्शन, पर सिग्नल फिर भी नहीं मिले

10, Oct 2016 By Pagla Ghoda

नई दिल्ली. आपने ये कहावत तो सुनी होगी कि ढूंढने पर तो भगवान भी मिल जाते हैं। कुछ ऐसा ही वाकया पंजाबी बाग़ इलाके के दुग्गल साहब के साथ भी हो गया। दुग्गल साब कल शाम ढूंढने तो निकले थे कुछ और लेकिन क़िस्मत देखिये कि उन्हें उस ‘कुछ और’ के बदले भगवान मिल गये!

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मोबाइल का सिग्नल ढूंढते दुग्गल साब

हुआ ये कि पचपन वर्षीय खुशहाल चंद्र दुग्गल गत शाम साढ़े पांच बजे जब अपने बेंगलुरु में कार्यरत पुत्र सुकेश दुग्गल को फ़ोन मिलाने लगे तो उनके घर पे सिग्नल ही नहीं पकड़ रहा था। तो वो घर से बाहर निकल कर मोबाइल को ऊंचा उठा कर पैदल चलने लगे। लेकिन बाहर भी सिग्नल की एक ही डंडी दिखाई पड़ रही थी। सिग्नल ढूंढने की आस में पैदल चलते-चलते दुग्गल साहब पंजाबी बाग़ से पीरागढ़ी चौक तक पहुँच गये।

अब तक रात के साढ़े आठ बज चुके थे पर इस पूरे रास्ते में दुग्गल साहब को सिग्नल के दर्शन नहीं हुए। उसी समय उन्हें एक चक्कर सा आया और वो बेहोश होकर गिर पड़े। बाद में हॉस्पिटल में होश आने पर उन्होंने बताया कि उन्हें बेहोशी की हालात में साक्षात् भगवान् ने दर्शन दिए लेकिन सिग्नल के दर्शन फिर भी नहीं हुए।

स्वयं दुग्गल साहब के शब्दों में, “ओ यार, मैन्नू याद है, भगवान जी मेरे सुपणेच आये ते बोले पुत्तर तूं आज बहुत मेहनत कित्ती है, मैं वड्डा खुश आं, बता तू की चाह्न्दा है? मैं केया रब्बा मेरे घार च सिग्नल नी औंदे मोबैल दे, ओ तुस्सी ठीक कर दो। ते ओना ने केया पुत्तर ओदा कोछ नी हो सकदा, तूं कुछ होर मंग लै! दस्सो जी, ऐ हाल है सिग्नल दा!”

जहाँ, दुग्गल साहब की टेलीकॉम प्रोवाइडर कंपनी इस मामले में कुछ भी कहने से कतरा रही है, वहीं, डॉक्टरों के अनुसार दुग्गल साहब डायबिटीज के मरीज़ हैं और शुगर अचानक कम हो जाने की वजह से एक दो बार पहले भी बेहोश होकर गिर चुके हैं। उधर, दुग्गल साहब की कॉलोनी के लोगो ने बताया है कि “उनकी कॉलोनी के किसी भी हिस्से में नेटवर्क आना लगभग बंद हो चुका है। हाँ, सेलफोन का बिल और उसके छत्तीस रिमाइंडर एकदम सही टाइम पे आ रहे हैं।”