Sunday, 17th December, 2017

अखबार खरीद खरीद कर युवक बना करोड़पति

01, Jun 2017 By Rahul Vind

गुरुग्राम में एक अजीबो गरीब घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। काल सेंटर में काम करने वाले इंजीनियर मिकेश जब अचानक से करोड़पति बन गया।मिकेश का इनोवेटिव आईडिया लोगो के सर चढ़ कर बोल रहा है तो वही दूसरी ओर न्यूज़ पेपर कम्पनीज सर पकड़ कर रो रही है।

दरसल बात यह है कि कॉलेज पास करने के बाद ऑफ कैंपस सिलेक्शन से मिकेश गुरुग्राम में आकर नौकरी करने लगा। लेकिन आजकल सिविल सर्विसेज के बढ़ते क्रेज को देखते हुए मिकेश ने भी सोचा की थोड़ा थोड़ा वो भी पढता रहे ताकि जब कभी गंभीरता से पढ़े तो बेसिक्स पर मेहनत ना करनी पड़े। अब जैसे इंजिनीरिंग की तैयारी का पहला वसूल है कि कोचिंग लो ऐसे ही सिविल सर्विसेज की तैयारी का पहला वसूल है अखबार पढ़ो। सो लकीर का फकीर मिकेश भी टाइम्स ऑफ इंडिया लगवा लिया क्योंकि द हिन्दू की अंग्रेजी उसके ऊपर से जा रही थी। पेपर आने लगा मिकेश ने दो चार दिन पेपर पढ़ने की कोशिश भी किया लेकिन किसी भी दिन एडिटोरियल पेज तक पहुच नही पाया।

रद्दी वाले से नेगोशियेशन में एक्सपर्ट है इंजीनियर मिकेश
रद्दी वाले से नेगोशियेशन में एक्सपर्ट है इंजीनियर मिकेश

इतने रंग बिरंगे एडवर्टीजमेंट देख देख कर ही वह थक जाता था कि आजतक जान ही नही पाया कि इन एडवर्टीजमेंट के बीच किधर एडिटोरियल सेक्शन होता है। धीरे धीरे समय के साथ अखबार को पढ़ना तो दूर उसे खोलना भी छोड़ दिया। मिकेश की बालकनी में रोल किया हुआ पेपर ऐसे पड़ा हो जैसे हजार का नोट। एक महीना हुआ, पेपर वाला 150 रुपये अखबार के वसूल करके ले गया। अभी महीने की सैलरी भी नही आई थी और बेचारे मिकेश के पास बस 200 रुपये बचे थे उसमे से 150 पेपर के दे दिया। फिर उसने सोचा कि क्यों न बिना पढ़े हुए अखबार को कबाड़ी को बेच दी 20-30 निकल ही आएगा। कबाड़ी आया, तौला बोला 15 किलो हुए। 14 रुपये पर किलो के हिसाब से उसने 210 रुपया दिया और अखबार ले गया। मिकेश भौचक्का रह गया। उसको समझ नही आ रहा था कि ये तो गज़ब का बिजनेस है जिसमे प्रॉफिट मार्जिन 60% तक है। यहा तो बड़ी बड़ी कम्पनीज 2-3% प्रॉफिट मार्जिन पर चलती है। लेकिन अखबार वाले एडवर्टीजमेंट के चक्कर मे पेज इतने ज्यादा बढा दिए कि एक दिन का वजन आधा किलो हो गया जिससे उसका क्रय मूल्य तो 5 रुपये ही रहा लेकिन कबाड़ मूल्य 7 रुपये हो गया

अब मिकेश का इंजीनियर दिमाग खुला । उसने 3-4 अलग अलग हॉकर से अखबार मंगवाने लगा। वो सुबह सुबह मॉर्निंग वॉक के चक्कर मे बैग लेकर निकलता और जितना हो सकता था भर भरकर अखबार 5 रुपये के रेट से लाने लगा । हर सप्ताह वह कबाड़ी को बुलाकर उसे बेच कर हजारो रुपये प्रति सप्ताह कमाने लगा। तब तक तो ठीक था लेकिन हड़कंप तब मचा जब कॉल सेंटर में काम करने वाले मिकेश ने नई ऑडी खरीदी।

मिकेश की सफलता की खबर जंगल मे आग की तरह फैली और जिसने भी सुना स्तब्ध रह गया। हॉकर और अखबार डिस्ट्रीब्यूटर तो कोमा में चले गए यह सुन कर की अभी तक वो क्या कर रहे थे। कुछ डिस्ट्रीब्यूटर तो रोज सुबह 4 बजे अखबार खरीद कर सुबह 6 बजे कबाड़ी को बेचना शुरू कर दिए। यह खबर फैलने पर तिलिस्मी बाबा, ज्योतिषी, जापानी तेल वाले हकीम आलम , दीवाली होली की शुभकामनाएं वाले बंटी भैया , केजरीवाल , मोदी इत्यादि विज्ञापन दाता सकते में आ गए और अखबार वालो को धमकी दिए कि ऐसा होता रहा तो वो विज्ञापन और पेड खबर सब बंद कर दिया जाएगा।

अब अखबार वालो ने इस समस्या का काट निकालने की सोची है। सब ने मिलकर एक कंसल्टेंसी कंपनी को हायर किया है जो इस फैक्ट पर एनालिसिस कर रही है कि किन किन बकवास या जेन्युइन खबरों को काट दिया जाए जिससे कि अखबार का वजन कम होकर इतना हो जाए की बिना एडवर्टीजमेंट और पेड न्यूज घटाए अखबार का दाम और कबाड़ का दाम दोनों बराबर हो जाये और मिकेश जैसे को कोई प्रॉफिट ना मिले।