Monday, 18th December, 2017

जेल में बंद लालू हुए व्यथित

29, Oct 2013 By kaaalpanic

बहुचर्चित चारा घोटाले में सजा पा चुके राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख एवं पूर्व सांसद लालू प्रसाद यादव को अब घर की याद सताने लगी है। जेल में बंद लालू यादव को वैसे तो VIP सुविधा मिली हुई है। साथ ही उनकी पार्टी के कार्यकर्त्ता भी प्रतिदिन उनका मनोरंजन करने के लिए आते जाते रहते हैं।

उनको घर का बना खाना भी समय समय पर खाने को दिया जाता है। पर जैसे जैसे भारत का एकमात्र ब्रांडेड त्यौहार दीवाली नजदीक आ रहा है उनको जेल के अंदर उदास रहते देखा जा रहा है। वो ये बात किसी को कह नहीं रहे पर उनके चेहरे पर सब दिख जाता है कि वे अपने परिवार के साथ त्यौहार मनाने को बेचैन है।

Lalu in action.
Once upon a time, when Lalu was free.

ये बातें फेकिंग न्यूज रिपोर्टर काल्पैनिक से शेयर की उनकी पार्टी के एक जूनियर कार्यकर्त्ता ‘लल्लन’ ने। पेश हैं लल्लन से हुई बातचीत का संक्षिप्त ब्यौरा :

रिपोर्टर : तो आप कब से जेल में आ जा रहे हैं?

लल्लन : जब से नेता जी जेल में आए हैं तब से मैं उनके लिए घर का खाना सप्लाई करने के बहाने जेल में आते जाते रहता हूँ।

रिपोर्टर : तो आप को क्या लालू जी ने खुद कही घर जाने की बात?

लल्लन : नेता जी पहले भी जेल में रह चुके हैं तो इन्हें यहां भी घर जैसा ही महसूस होता है। इस बार भी चारा घोटाले में जेल में आने पर पहले तो उन्होंने कभी नहीं कहा कि वो यहां आकर दुखी हैं। वे आराम से लिट्टी खाते थे और अन्य कैदियों में भी बांट देते थे।

रिपोर्टर : तो अचानक वो उदास क्युं रहने लगे? क्या उन्हें अपनी गलती ( FODDER SCAM) पर पछतावा हो रहा है?

लल्लन : देखिए (रौबीले अंदाज में) नेता जी को CBI की मदद से फंसाया गया है। वे कभी भी भैंसो और गायों के साथ ज्यादती नहीं कर सकते। वो तो गऊ माता को पूजते थे। वो कभी ऐसा नहीं कर सकते। ये उनके राजनैतिक विरोधियों की चाल है। हमने ऊपरी अदालत में भी अर्जी दे दी है।

रिपोर्टर : अरे आप मुद्दे से भटक रहे हैं। आप ये बताइए दीवाली पर घर जाने की बात कब कही उन्होंने आपसे?

लल्लन : आपको तो मालूम है नेता जी कितने हंसमुख नेता है। जनता में लोकप्रिय हैं। हर त्यौहार पूरे रीति रिवाज, उल्लास से मनाते हैँ। उनका होली उत्सव कैसे मनाया जाता है वो तो पूरे बिहार के साथ साथ देश की जनता जानती है।

रिपोर्टर : आप फिर मुद्दे से भटक रहे हैं? सही बात बताइए वरना खत्म करता हूँ इंटरव्यू।

लल्लन : जी बात ये थी कि कल रात खाना खाने के बाद हाथ धोते हुए मैने उनकी आंखों में नमी देखी। क्युंकि खाना खाते वक्त उनकी कोठरी में कोई और नहीं होता है। तो मैने हिम्मत कर के पूछ लिया कि क्या हुआ नेता जी। पहले तो धत्त बुङबक कछु नाहीं हुआ कहकर टाल दिया। पर दोबारा पूछने पर वो भावुक हो गये और बोले : राबङी की याद आ रही है लल्लन। कल ही जेलरवा पूछ रहा था कि दीपावली आ रही है, लालू जी साफ सफाई करवा दूं आपके सैल की। तो पुरानी बातें फिर से आ गई कि कैसे दीवाली पर तुहार मैडम राबङी, घर की साफ सफाई करती थी। मैं भी तेजस्वी, तेजप्रताप के साथ थोङा बहुत साफ सफाई करवा देता था। बदले में हमें राबङी अपने हाथों से गुझिया बनाकर खिलाती थी। रात को हम फूलझङी, बम, अनार चलाते थे। सब बच्चे, साधू, सारे कार्यकर्त्ता इकट्ठे होते थे घर पर। कित्ता मजा आता था। पर इस बार तो सब बँटाधार हो गया।

रिपोर्टर : तो लालू जी दीवाली के लिए घर जाना चाहते हैं?

लल्लन : जी हां।

रिपोर्टर : तो आपने जेल के अधिकारी, या उनके परिवार के किसी सदस्य को उनकी ये इच्छा बताई?

लल्लन : अभी तक तो नहीं, नेता जी ने मना किया था, पर मैं राबङी जी तक जरुर उनकी ये बात पहुँचाउंगा। और दीवाली की पूजा उनकी जेल में नहीं घर पर करवा कर रहूँगा। चाहे कुछ भी हो जाए। मैं खुद जेलर को ये बात बताऊंगा और अगर वो न माना तो एक अपराध मैं भी कर सकता हुं।

रिपोर्टर : कैसा अपराध?

लल्लन : नेता जी को जेल से भागने में मदद कर सकता हूँ।

रिपोर्टर : आपकी इच्छा पूरी हो और आपको इस काम के लिए पार्षद का टिकट मिले ऐसी आशा करता हूँ।

ये सुनकर लल्लन बिना धन्यवाद किए लालू जी का झूठा टिफिन लेकर वहां से चल दिया।