Monday, 23rd October, 2017

मेक इन इंडिया पश्चिम बंगाल में लागू, घरों में बनेंगे देशी बम

30, Mar 2016 By Ritesh Sinha

कोलकाता  – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान में एक और अध्याय जुड़ गया है । देश में गोले बारूद की कमी को पूरा करने का लोड प.बंगाल ने ले लिया है । उनका कहना है कि सभी राज्य मेक इन इंडिया में कुछ न कुछ सहयोग कर रहे हैं तो हम भी कैसे पीछे रह सकते हैं । इसलिए हमने हर घर के पिछवाड़े में बम बनाने का निर्णय लिया है ।

जब गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ये खबर सुनी तो उसने कहा कि हम बम बनाने की तकनीक किसी को नहीं दे सकते, तो वहां के लोगों ने कहा है कि अगर सेना के लोगों को बम बनाना नहीं आता तो हम उन्हें फ्री में सिखा सकते हैं ।

ममता बनर्जी का मानना है कि पश्चिम बंगाल नंबर वन है
ममता बनर्जी का मानना है कि पश्चिम बंगाल नंबर वन है

ऐसे ही एक बम बनाने वाले व्यक्ति डेविड से बात कि हमारे रिपोर्टर “बोल बम यादव” ने । वैसे तो उसका नाम डेविड नहीं है लेकिन उसने कहा कि- अगर हम उसका नाम छापेंगे तो वो हमारे रिपोर्टर के लिए भी बम बनाने के बारे में विचार कर सकता है । इसलिए अपने रिपोर्टर की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए हमने उनका नाम बदल दिया है।

डेविड ने बताया – “मेरे बेटे को चार बम का आर्डर मिला था। वो अपने आर्डर को पूरा करने के लिए जी जान से लगा हुआ था कि तभी हमारे घर के पिछवाड़े में एक विस्फोट हुआ और उसकी मौत हो गई। अब जुबान तो जुबान होती है, उसका आर्डर मैं पूरा करूँगा” – डेविड ने आत्मविश्वास से कहा ।

एक और युवक “डगलस” ने हमें बताया कि वो पान की दूकान चलाता है। दिन में पान बनाता है…..रात को बम बनाता है। जब हमारे रिपोर्टर ने पूछा कि आपको बम बनाना किसने सिखाया तो उसने बताया कि- “जिसने मुझे पान बनाना सिखाया”, जब हमारे रिपोर्टर ने पूछा की आपको मौत से डर नहीं लगता ? तो उसने बताया कि ” मौत से डर नहीं लगता साहेब … थप्पड़ से लगता है।

एक और आदमी ” डैनी ” ने हमें बताया कि – मुझे बम बनाकर फलां जगह पर फोड़ने का आर्डर मिला था लेकिन बीच में मेरी तबियत खराब हो गई और मुझे बिजनेस में भारी नुक्सान हो गया ।

इस बीच प.बंगाल सरकार ने कहा है कि- हम रॉ मटेरियल की कोई कमी नहीं होने देंगे। बम बनाने के लिए जो भी चाहिए वो जनता को सरकार उपलब्ध कराएगी। अगर हमें कुछ चीजें “इम्पोर्ट” भी करना पड़ा तो हम करेंगे ।

इस पर “आल बोंगो बम सप्लायर सगठन” के मुखिया ने कहा है कि हमें तो यहाँ कुछ नहीं मिलता हम तो पहले से “इम्पोर्ट” कर रहे हैं । कई अर्थ शास्त्रियों का मानना है की इस नए उद्योग से प.बंगाल को सालाना पांच सौ करोड़ का फायदा होगा और लगभग दस हज़ार युवाओं को रोज़गार मिलने की सम्भावना है। कई उदारवादी संगठनों ने इसकी सराहना की है और कहा है कि यदि लोगों को रोज़गार मिलता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी ।