Saturday, 20th January, 2018

वित्तीय वर्ष 2018 - हिन्दी विकास और अभ्यास योजना

09, Dec 2017 By Pallavi Barnwal

युवा वर्ग के बीच हिन्दी की डुबकी लगाती हुई दुर्दशा देखकर सोमवार को आलाकमान ने एक अहम मीटिंग बुलाई| इस मीटिंग में विपक्षी पार्टियों के सभी प्रतिनिधि और सत्ता के आनंद में लिप्त सभी मंत्री भी शामिल हुए| क्यूँ कि हिन्दी कौमी मुद्दा है, इसलिए आलाकमान सारे पहलू पर विचार विमर्श करना चाहते थे| मीटिंग में अनेक बेशक़ीमती सुझाव पेश किए गये|

क्या हिन्दी को विलुप्त प्रजाति घोषित किया जाए और युनाइटेड नेशन में इसकी एक अर्जी डाल दी जाए? या फिर हिन्दी के सम्मान में विभिन्न प्रांतों में म्यूज़ियम बनाया जाए जिसमें हिन्दी सीखने की पुस्तकें प्रदर्शनी के लिए रखी जाए, ताकि स्कूल के बच्चे, कॉलेज स्टूडेंट्स और मुलाज़िम रविवार को यहाँ आए और हिन्दी सीखे? प्रख्यात साइकॉलजिस्ट जो की ‘‘अखिल भारतीय अंग्रज़ी दिखावा समिति’’ के अध्यक्ष हैं, से भी टिप्पणी ली गयी|उनका कहना है, हिंगलिश को राष्ट्र भाषा घोषित कर दिया जाए क्यूँ कि आज ज़्यादातर लोग इस नयी भाषा का उपयोग कर रहे हैं|

माननीय उर्जा मंत्री ने ये सुझाव दिया कि अँग्रेज़ी का प्रयोग, सिर्फ़ गर्मियों के मौसम में अनिवार्य कर देना चाहिए| उनका कहना है कि लोग अँग्रेज़ी का इस्तेमाल करके कूल लगते हैं तो इस सुझाव से बिजली की बचत होगी और पर्यावरण संरक्षण भी होगा|

मीटिंग में आम आदमी शोषण विभाग के अध्यक्ष, माननीय वित्त मंत्री जी ने नोट किया की ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अँग्रेज़ी के उपयोग में भारी उछाल आया है| ऐसा इसलिए है, क्यूं कि लोगों का लगता है जिसकी अँग्रेज़ी ज़्यादा अच्छी होगी, वो उतना ही ज़्यादा अमेरिकन लगेगा और उसे वीसा जल्दी मिलेगा|

माननीय शिक्षा मंत्री ने ये सुझाव दिया की स्कूल में हिन्दी बोलने पर छात्रों से जो जुर्माना कमाया जाता है, उसे हिन्दी विकास कार्य में ही लगाया जाए| उन्होने ये भी कहा, कि हिन्दी के अंक दोगुना कर देना चाहिए ताकि अभिभावक अपने बच्चों को अच्छे नंबर लाने के चक्कर में हिन्दी बोलने के लिए मजबूर करे|

मीटिंग काफ़ी लाभकारी रही, और हम आशा करते हैं कि अगले चुनाव तक इन सारी योजनाओं पर अमल ज़रूर होगा|