Wednesday, 20th September, 2017

विश्व के सबसे खतरनाक युद्ध का आंखो-देखा हाल

29, Oct 2015 By श्रीकांत चौहान

शंख की ध्वनि आकाश में गूंज रही है, युद्ध की शुरुआत होने वाली है। मैदान के एक छोर पर हैं महाराज कालेन्द्र की सेना और दुसरे छोर पर हैं महाराज निकुंभ की सेना और दोनों सेना एक दुसरे के रक्त की प्यासी लग रही है। सैनिको, घोड़ो, ऊंट, हाथी सब कुछ अश्त्र-शश्त्र से लदे पड़े हैं, इंतज़ार हैं तो बस महाराज के आदेश का।

आक्रमण……………..की ध्वनि मैदान में गूंजती हैं, महाराज कालेन्द्र ने अपनी सेना को बढ़ने का हुक्म दे दिया है, सैनिक तेज गति से आगे बढ़ रहे है, हमलावर को आते देख महाराज निकुंभ ने भी अपने सैनिको को हमला करने का आदेश दिया। निकुंभ के सैनिक ढाल बनकर खड़े हो गए है.. कालेन्द्र के सैनिको को आगे बढ़ने से रोक रहे है। मैदान में तलवारों व भालो के टकराने की आवाज़ बढती जा रही है, कोई किसी से कम नहीं।

रणभूमि की एक ज़लक
रणभूमि की एक ज़लक

युद्ध निति के तहत महाराज निकुंभ ने अपने घुड़सवारो को आगे किया..घुड़सवार बहुत ही फुर्तीले व जांबाज़ है, फटाक से वो कालेन्द्र की सेना की एक टुकड़ी को चित करते हुए राजा के समीप पहुँच जाते थे..ये बहुत अच्छा मौक़ा हैं कि वो राजा कालेन्द्र का काम तमाम कर दे लेकिन तभी कालेन्द्र के सेनापति ने मौक़ा पाकर घुड़सवारो की गर्दन उड़ा दी और मैदान को रक्तरंजित कर डाला। खुद पर सीधा हमला हुआ देख कालेन्द्र बौखला गया है..उसने पूरी टुकड़ी को आक्रमण का आदेश दिया तो उधर से महाराज निकुंभ ने भी पूरी फ़ौज को हमला करने का निर्देश दे डाला।

उफ़… कितनी निर्दयता है… चारो तरफ खून बिखरा पडा हैं.. ऊंट व हाथी पर सवार योद्धा जमीन से लड़ रहे सैनिको की गर्दन उड़ाते हुए आगे बढ़ रहे है… हाथी के द्वारा दोनों तरफ के सैनिको को कुचला जा रहा है…ओ ह्ह ये क्या.. निकुंभ के सेनापति ने बड़ी ही चतुराई से पीछे से आकर कालेन्द्र के सेनापति की गर्दन उड़ा दी.. राजा शोक में आ चुका है। उसकी लगभग पूरी फ़ौज समाप्त होने के कगार पर हैं लेकिन निकुंभ की सेना आगे बढती जा रही है। अब राजा कालेन्द्र की हार निश्चित है…उसके पास चंद सैनिको के अलावा कुछ ना है.. लेकिन वो हार नहीं मनाता। उन्ही के सहारे वो अपने स्वाभिमान की रक्षा करने आगे बढ़ता हैं लेकिन अकेला चना कहाँ भाड़ फोड़ पाता है… देखते ही देखते दोनों सेना में हुई जंग में कालेन्द्र के सैनिक समाप्त हो जाते है।

अब मैदान में कुछ हैं तो बस चारो तरफ लाशें, ढेर सारा खून और एक निहत्था राजा जिसकी मौत तय है। अपनी जीत तय करने के लिए निकुंभ आगे आता हैं और वो कालेन्द्र की गर्दन पर वार करने ही वाला होता हैं कि तभी एक महिला की आवाज़ आती हैं – ठहरो……………अअअअअअअअअअअअअ कौन हैं ये महिला? दोनों राजा पलटकर देखते हैं.. दोनों की आँखों में भय क्यों हैं? महिला और नजदीक आती हैं और कहती हैं- निकू और कालू.. नालायको.. सारा दिन शतरंज ही खेलते रहोगे तो पढ़ाई कौन करेगा… तेरे पापा आयेंगे तो गुस्सा करेंगे.. जाओ होमवर्क करो… और उस महिला ने सभी सैनिको, घोड़ो, ऊँटो व हाथियों को एक बक्से में बंद कर दिया तथा युद्ध का मैदान यानी वो शतरंज.. समेट कर रख दिया.. जालिम महिला, अब महाराज निकुंभ व कालेन्द्र अपना अगला युद्ध कल लड़ेंगे।