Friday, 20th October, 2017

विदेश नीति पर ड्रोन स्ट्राइक

21, Jul 2017 By Manpreet Singh

मित्रों, मैं एक अमरीकी वायुसेना का ड्रोन विमान हूँ| मुझे दो अमरीकी वायुसेना पायलट एयरबेस के ही एक सुरक्षित कमरे में लगे 2 वीडियो स्क्रीन के सामने बैठ कर, एक joystick और computer के द्वारा नियंत्रित करते हैं| मेरे कैमरे उनकी आँखें हैं और उनके एक बटन दबाने पर में मिसाइल और बम चला सकता हूँ|

पिछले 10-12 साल से मेरी same routine है| मैं अफ़ग़ानिस्तान के बगराम एयरबेस से उड़ान भरता हूँ और पहाड़ीयों से लेफ्ट राइट कट मारता हुआ वज़ीरिस्तान,जो पाकिस्तान में हैं,पहुंचता हूँ| उस वक़्त रात होती है| तो कोई मुझे देख नहीं सकता| वैसे दिन भी होता, तो भी इतनी ऊंचाई पे मेरा कुछ ना बिगाड़ लेते| जिसके ऊपर में चक्कर लगा रहा हूँ, वह घर एक तालिबान कमांडर का है| अभी वो घर पे नहीं है| पर घर में बीवी बच्चे सो रहे हैं| जब सूरज की पहली किरण के साथ कमांडर घर लौटा तब भी परिवार घर पे था| मुझे नहीं मालूम आतंकी कमांडर को मारने का ये मौका फिर कब मिले| सो मुझे सैकड़ों मील दूर बैठे ऑपरेटर से निर्देश मिला और मैंने मिसाइल चला दी| घर उड़ा दिया| कुछ देर बाद मैंने देखा पड़ोसी मलबे से लाशें निकाल रहे थे| मेरे काम का एक और हिस्सा है कार्रवाई के बाद लाशों की गिनती करना| ये उतना आसान नहीं खासकर तब जब लाशें छोटे छोटे टुकड़ों में हो|

मुँह तोड़ जवाब देने के लिए तैयार
मुँह तोड़ जवाब देने के लिए तैयार

मगर इस बार मुझे पता था गिनती थी सात, आतंकी कमांडर सपरिवार| दुपहर तक लाशें निकाल कर जनाज़े की तैयारी हो गई| इनके यहाँ रीति है 24 घंटे में दफनाने की| ये मेरे लिए अच्छा संयोग है क्यूंकि में इतनी ही देर लगातार उस इलाके में उड़ता रह सकता हूँ | मैंने जनाज़े की भीड़ को एक ऊँचे टीले पर बने कब्रिस्तान तक जाते देखा| मेरे पास सूचना थी की तालिबान कमांडर का एक और आतंकी भाई भी जनाज़े में शामिल होगा| सो मैं धैरपुर्वक प्रतीक्षा करता रहा| जब सब पहुँच गए और नमाज़ पड़ी जाने लगी,तभी सैकड़ों मील दूर बैठे ऑपरेटर ने फिर फायर बटन दबाया| मैंने उस भीड़ पर भी मिसाइल चला दी | फिर ना जाने कब दूसरे आतंकी भाई को मारने का मौका मिलता| इस बार लाशें ज़्यादा हैं, गिनने में काफी वक़्त निकल जाएगा| क्या ये सही है या गलत, सोचना मेरा काम नहीं| एक देशभक्त ड्रोन हो या सैनिक सदैव आदेश का पालन करता है|

और यहाँ से पास ही में पाक अधिकृत कश्मीर है| जहाँ इन दो आतंकी भाइयों से कहीं गुना ज्यादा आतंकी भारत का खून बहाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं| पर मुझे वहां बम बारी की इज़ाज़त नहीं | शायद आतंकवाद दो प्रकार का होता है, अच्छा और बुरा|और वो शायद अच्छे आतंकवादी है|बात में शायद कोई तुक ना हो पर मैं सिर्फ एक ड्रोन हूँ| एक मिलिट्री मशीन| पिछले 10-12 साल से मैं आँखें खोल और मन मूँद कर वही कर कर रहा हूँ जो मेरे आका Bush, Obama और Trump ने मुझे आदेश दिया| तो मित्रों, विदेश नीती गयी घुइआं के खेत में | अंतरास्ट्रीय मंच पे गला फाड़ के कुछ ना हुआ| क्यूंकि आतंकवाद कितने प्रकार का होता है?