Tuesday, 12th December, 2017

'वेलेंटाइन डे' और 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' के झगड़े में बहू ने सास का सर फोड़ा

14, Feb 2016 By बगुला भगत

इंदौर. ‘वेलेंटाइन डे’ और ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ के चक्कर में सास-बहू में मारपीट की नौबत आ गयी। बहू पर आरोप है कि उसने धक्का देकर अपनी सास को गिरा दिया, जिससे सास के सर में गंभीर चोट आ गयी। पुलिस ने आरोपी बहू को गिरफ़्तार कर लिया है और उससे पूछताछ कर रही है।

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‘वेलेन्टाइन डे’ पर सास अशरफ़ी को ताना मारती बहू

यह घटना कस्तूरबा नगर की है, जहां गोपेंद्र तिवारी ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ मनाने अपनी मां अशरफ़ी देवी के पास गये हुए थे। गोपेंद्र अपनी मां को गिफ़्ट देने के लिये इंटैक्स का एक स्मार्टफ़ोन लेकर गये थे, जिसके बारे में उनकी पत्नी सारिका को पता नहीं था।

मोबाइल देखते ही ने सारिका ने ताना मार दिया- “मम्मी को इस उम्र में किससे चैट करनी है!” अशरफ़ी ने भी तुरंत पलटकर जवाब दे दिया- “मैं तो किसी से नहीं करती पर तुम तो दुनिया भर से चैट लड़ाती फिरती हो!” बस इसी बात पे झगड़ा शुरु हो गया। नौबत यहां तक पहुंची कि सारिका ने अशरफ़ी को धक्का दे दिया।

पीड़िता अशरफ़ी देवी ने हमारे संवाददाता को कराहते हुए बताया, “कुछ दिन पहले ही तो करवाचौथ मनाया था इस राजकुमारी ने! उससे दिल नहीं भरा इसका! पता नहीं मेरे गप्पू (गोपेंद्र का घर का नाम) से क्या-क्या मंगवाया होगा। बड़ी बहू बता रही थी कि ये करवाचौथ उसे 40-50 हजार से कम नहीं पड़ा।”

“अब इस वेलएंडटेन डे के नाम पे ये फिर अपनी कोई डिमांड पूरी करवा लेती। ये अंग्रेज भी मेरे गप्पू का घर बर्बाद करने पे तुले हुए हैं। रोज इनका कोई ना कोई ‘डे’ आया रहता है।” कहकर अशरफ़ी सुबकने लगीं।

उधर, इस देसी और विदेशी त्योहार के चक्कर में बेचारे गजेंद्र पर दोहरी मार पड़ गयी। मां की मरहम-पट्टी कराने के बाद अब वो पत्नी की ज़मानत के लिये थाने के चक्कर काट रहा है। थाने के बाहर चाय के खोखे पे बैठे गोपेंद्र ने बताया कि “ये कल से ही मॉल चलने की ज़िद कर रही थी। मैं जैसे-तैसे समझा के लाया था कि दो-एक घंटे की ही तो बात है। हम कौन सा मम्मी के घर बसने जा रहे हैं। बस पैर-वैर छूकर वापस आ जायेंगे। मॉल में कल चले चलेंगे।”

“मैंने उसे पिछला वेलेंटाइन भी याद दिलाया था। वहां रेस्टोरेंट में बजरंग दल वाले आ गये थे। पिज्जा तो धरा का धरा रह ही गया, चांटे अलग से पड़े।” गोपेंद्र ने पिछले साल की घटना को याद करते हुए कहा।

तभी एक सिपाही आया और ज़मानत के आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करने के लिये गोपेंद्र को थाने के कोने में ले गया। अंतिम समाचार लिखे जाने तक चर्चा जारी थी।