Saturday, 29th April, 2017

यूपी चुनावो में हार के बाद अखिलेश-राहुल की फोन पर हुई बात-चीत

17, Mar 2017 By Manan Krishna

यूपी चुनावों में तगड़ी शिकस्त खाने के बाद राहुल-अखिलेश के बीच हुई एक गुप्त फ़ोनवार्ता की सीडी फेकिंग न्यूज़ के हाथ लगी. दोनों के बीच हुई बात-चीत के अंश:

रिंगटोन में गाना बजता है… ‘यूपी को यह साथ पसंद है…..’

राहुल: हैलो अखिलेश, कैसे याद किया.. थोड़ी देर बाद करें वो क्या है कि ‘डोरेमोन’ का नया एपिसोड चल रहा है, तू भी देख काफी मजेदार है.

अखिलेश: भाई बहुत करारी हार हुई है, चेहरा छुपाना भी मुश्किल हो रहा है, और तुझे डोरेमोन कि पड़ी है!

"यार ये किसके चक्कर में पड़ गया!"
“यार ये किसके चक्कर में पड़ गया!”

राहुल (हंसते हुए): चिंता मत करो, कुछ दिनों की बात है, बाद में सब ठीक हो जाता है.

अखिलेश (आश्चर्य से): यार यहाँ इतनी बुरी हार हुई है और तुम हंस रहे हो?

राहुल (और ज़ोर से खिलखिलाकर हंसते हुए): भाई तेरा यह पहली बार है न, इसी लिए टेंशन में हो. देख मुझे तो आदत हो चुकी है, अब जब साथ में हो तब आदत डाल ही लो (कह कर ‘यूपी को यह साथ पसंद है’ गुनगुनाने लगते हैं)

अखिलेश: यार यहाँ सब से लड़-झगड़ मैं तेरे साथ आया, बुरी तरह हारा और तुझे कोई टेंशन नहीं?

राहुल: ओये टेंशन लेके क्या उखाड़ लेंगे, ऐसे भी हार तेरे कारण हुई है, और जो भी सीटें आयी है वो मेरे कारण. मेरी दिग्गी अंकल से बात हो चुकी है, शाम की खबर में उनकी नयी खोज बयान देख लेना (बोल राहुल फिर गुनगुनाने लगते हैं)

अखिलेश (गुस्से से): कैसे-कैसे? मेरे कारण हार कैसे हुयी? और सारी जीती सीटें तूने कौन सी ‘फैक्ट्री में उगायी, यह भी बता?

राहुल: ओए देख “This morning when I got up in night” मैं सपना देख रहा था. सपने में छोटा भीम ने मुझे सारी बातें समझायी. देख भाई ऐसे भी आज जमाना एस्केप वेलोसिटी का है और तू साईकिल पर चल रहा है, कम से कम मोपेड तो लेना था, दूसरा तेरी टोपी का रंग भी भगवा लग रहा था. वोटर इसी से तो कंफ्यूज होते है. यकीन नहीं है तो दिग्गी अंकल से बात कर ले. ऐसे भी हार गरीबी की तरह एक मानसिक अवस्था है

अखिलेश(अफ़सोस के साथ): अब क्या करें?अब तो लगता है लंबा इंतज़ार करना पड़ेगा, पापा की डांट पड़ेगी सो अलग

राहुल: देख भाई तजुर्बे से कह रहा हूँ, हार के अपने अलग फायदे हैं, मैं आराम से छोटा भीम और मोटू पतलू देख सकूंगा, तू भाभी को टाइम दे पाएगा, बीच में (आँख मारते हुए) छुट्टियां मारने दोनों भाई इक्कट्ठे चलेंगे, सोच कितना मजा आएगा

अखिलेश(सोचते हुए): बात में दम तो है भाई, लेकिन छुट्टियों में चलेंगे कहां

राहुल (धीरे से): बैंकॉ…. (आगे शब्द सुनाई नहीं दिए)

अखिलेश (ख़ुशी से उछलते हुए): बहुत बढ़िया, मैं बैग पैक करता हूं, अगले हफ्ते हीं निकलते हैं. तू दिग्गी अंकल को बोल के मिडिया को बरगलाने के बयान खोजवा लियो

राहुल: फ़िक्र ना कर भाई, पुराना तजुर्बा है, तू चंपक और छोटा भीम के कॉमिक्स रख लियो. ठीक है फिर बाय

अखिलेश: बाय बाय