Tuesday, 12th December, 2017

उड़नखटोले और बिहार चुनाव- नॉन सीक्रेट डायरी

26, Oct 2015 By khakshar

बिहार चुनाव में पार्टियों का कुल प्रचार बजट चार-पाँच हजार करोड़ से भी ऊपर पहुँच (चँहूप गया हैं, एस दे कॉल इट इन बिहार)। पटना के अति सुव्यवस्थित एयरपोर्ट से एक ही दिन में अठारह उड़नखटोले उड़ान भर रहे हैं। एयरपोर्ट के पास ही एक नवी-नवेली पार्टी के अध्यक्ष मिल गए। बाप -दादा हेलीकॉप्टर में ही शौचालय जाते थे का दावा करने वाले मुझ जैसे टुल्ले- कोरेस्पोंडेंट को प्रश्न पूछने पर मेरी औकात दिखाने लगे।

आरोप-प्रत्यारोप में ऊँगली उठाना एक दशक पुराना हैं
आरोप-प्रत्यारोप में ऊँगली उठाना एक दशक पुराना हैं

बिहार में दुसरे की औकात पर टिप्पणी किसी चुनावी जुमले से ज्यादा प्रचलित हैं। खैर, मैं भी पत्रकारों की तरह मोटी चमड़ी (थेथ्रो लॉज) बना रहा और उन्हें ओर्नोब गोस्वामी की तरह मुझे भी बंधक बनाने का कयास करता रहा। कही उनके कृपा-दृष्टि से इस टुटपुंजिये पत्रकार का भी नाम हो जाए। ज्ञातव्य हो को आज भी गोस्वामी जी उनके नाम से शिवराते हैं (Bihari tense ऑफ़ to shiver), नब्बे की दशक की घटना को याद करके।

सूत्र बताते हैं की एक राष्ट्रीय पार्टी अध्यक्ष, जो दो महीने से बिहार में डेरा डाले हुए है, अपनी पार्टी की जिला इकाइयों और राज्य के नेताओं से क्षुब्ध हैं। खाकड़ा, ढोकला खाने वाले को दिन में तीन बार सतुआ, मकुनी, लिट्टी आउ दही-चुडा खिलाइएगा तो!

इधर खुद को सबसे बड़ा गौ- पालक घोषित करने वाले ठेकुआ कुतरते हुए उड़न खटोला से ही नीचे लगी जनता की भीड़ को ताड़ लेते हैं की कौन सी रैली में पब्लिक को कितना चारा डालना हैं। आखिर नौ -सौ करोड़ का चारा ,किस काम आएगा। विपक्षी बताते हैं की गौ-पालन की आय तो परिवार का निर्वाहन करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं फिर बच्चों के BMW और Indian Bike सरीखे शौक़, और कोई चारा भी तो नहीं बचा। समर्थक बताते हैं की एक समधियाना रूठा हैं तो क्या हुआ, बाकी छेः तो साथ में हैं। यकीन न आए तो एक्स – भोजपुरी सुपरस्टारनी “नगमा” जी के सीतामढ़ी वाले रैली का चित्र देखिये। हरियाणा के पूर्व मंत्री और गौ-पालक के एक अन्य समधी, कैसे ठुमके लगा रहे थे।

तांत्रिक और सुशाशन के बारे में अगली रिपोर्ट में।

चेतावनी: पत्रकार से बिहार के सुलभ शौचालय में दो रुपये की जगह दस रुपये लिए जाते हैं, ज्यादा गन्दगी फैलाने के एवज में।