Thursday, 17th August, 2017

थाना में बड़े मुँशी ने लिख डाला महा-काव्य

10, Aug 2017 By khakshar

हमारे रिपोर्टर्स को अक्सर पुलिस थाना का चक्कर लगाना पड़ता हैं। ऐसा ख़बर बनाने और निकालने के लिए करना पड़ता हैं, और किसी कारण से नहीं। ऐसे चक्कर के बहुत लाभ होते हैं। एक थाने में एक बड़े मुँशी जी की लिखी हुई कविता मिल गई। थाने में लिखा-पढ़ी करने वाले मुँशी आजकल कम्प्यूटर पे रपट लिखने लगे हैं। सरकारी कागज़ पर ऊसुली, बाकी और कभी-कभार शायरी भी लिख डालते हैं।

बड़े मुँशी जी की रचना–

गाँधीनगर के विधायक चार, आप करवायो तो हैं सदाचार, मुलाज़िम करें तो भ्रस्टाचार, कमाल करते हैं सरकार।Kanhaiyalal

विपक्ष बाँधे MLA तो अत्याचार, पिछले शाशक किए व्यभिचार, हरयाणे के विकास का सुविचार, गज़ब ढा रहे हैं आप सरकार।

विपक्ष हैं अपने से ही लाचार, पप्पू,टीपू ,तेज के हास्य विचार, उनके माँ -पिता करते चीत्कार, थोड़ा सब्र तो बाँधिये सरकार।

मन्त्री करे मीडिया पे तेज प्रहार, नियम बनाने पर करे न विचार, जल्दी बदलती सत्ता की ब्यार, बाकि आप समझदार हैं सरकार।

डाटा का ख़ुब बनता हैं अचार, फ़िर भी प्रगति दिखती लाचार, cess है कोई वित्तीय अत्याचार, भ्रमित मत कीजिये सरकार।

इधर बाबा जी का अपना विचार कहे विदेशी का करो बहिष्कार, बढ़ाओ कुछ स्वदेशी व्यापार, आप से क्या छुपा हैं सरकार।

ट्रेन की सीट पर पहुँचा उपचार, लेकिन ट्रेन चले लेट घण्टे चार, खाना देख हुआ मन हीं बीमार, क्षमा कर देना छोटे सरदार।

इस बार भी फैला जापानी -बुखार, योग से ही कर दो उपचार, इतने बोझ में भी हँसे खाकसार, आप भी मुस्कुराइये थोड़ा सरकार।

चेतावनी: थाना में कार्य से हीं जाए। मुँशी रपट लिखवाने वाला समझ काग़ज़, कलम और कार्बन पेपर माँग सकते हैं। साथ में प्यास बुझाने लिए… सरकार ग्रामीण थाना को इतना मालमाल करती हैं की बजट दिन पैट्रोलिंग में हीं मुँह बा देता हैं। ऊपर से हवालात में लेटे FN के निठ्ठले पत्रकारों को खाना भी खिलाना पड़ता हैं।