Monday, 23rd October, 2017

सुप्रीम कोर्ट ने "तीन महीना नोटिस पीरियड" और एम्प्लाइज को दिए जा रहे जबरिया तलाक़ को असंवैधानिक करार दिया

22, Aug 2017 By Pritesh

आईटी कम्पनियाँ अपनी सहूलियत के हिसाब से “कैंपस जिहाद” करती आयी है। भोले भाले मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रीकल इंजीनियरों को अपने प्री-प्लेसमेंट टॉक से बहलाया फुसलाया जाता है। IT में ज्वाइन करवा लेने के बाद इन कंपनियों के ट्रेनर सबसे पहले इन्हे आईटी वाला बनाने की ट्रेनिंग देते है याने धरम परिवर्तन। बेचारे नॉन आईटी बैकग्राउंड से आये इंजीनियर जैसे तैसे आईटी की ट्रेनिंग लेकर, रट्टा घिस्सा मार कर प्रोजेक्ट पर काम करते है।

सब हड़ताल के लिए रवाना होते हुए
सब हड़ताल के लिए रवाना होते हुए

किन्तु आजकल मंदी के नाम पर यही कम्पनियाँ बेचारे इंजीनियरों को पुराना और outdated कह कर तलाक़ दे रही है। बदले में फिर नए नवेले मासूम इंजीनियरों को बकरा बना कर ज्वाइन करवा लेती है।

IT कम्पनीयों के पर्सनल HR law बोर्ड अपने मन माफिक policies  बना लेते है। किसी भी टुच्ची सी पालिसी का हवाला देकर एम्प्लाइज को निकाल देते है। अगर कोई एम्प्लोयी किसी भी पालिसी के हत्थे न चढ़ पाए तो उसको कॉस्ट कटाई का शिकार बनाया जाता है।

इतना ही नहीं, अगर कोई एम्प्लोयी अच्छी सैलरी और पोजीशन के लिए दूसरी कंपनी में जाना चाहे तो उसे पुरे ३ महीने इंतजार करवाया जाता है।  ३ महीने घिसने के बाद उसे निवृत्ति पत्र दिया जाता है।

इन्ही मनमानियों के खिलाफ आज देश की सर्वोच्च न्यायालय ने “तीन महीना नोटिस” और एम्प्लाइज को जबरिया दिए जाने वाले तलाक़ पर रोक लगा दी है। सभी छोटी बड़ी आईटी कंपनी में काम करने वाले हम्मालों  मतलब इंजीनियरों ने इस फैसले का स्वागत किया है। सभी ने अपने हिसाब से चाय सुट्टा ब्रेक लेकर इसे सेलिब्रेट भी किया है।