Friday, 20th October, 2017

सुलभ शौचालय में हुआ हंगामा, पेशाब करने के बाद मूत्रालय में थूक ना फेंकने पर सह-पेशबियो ने की युवक की जमकर धुनाई

13, May 2016 By sameer mahawar

पटना। शहर में जहाँ पहले शराब को लेकर मार-कुटाई की घटनाएं घटित होती थी, वहीं आज पेशाब को लेकर अजीबो-गरीब वारदात सामने आई है।

बताया जा रहा है की रमेश (सुपुत्र सुरेश ऐंव सुपौत्र नरेश), जो अक्सर सड़क की नुक्कड़ों और गलियों पर खुलम-खुला पेशाब करना लाज़मी समझता है, एक दिन स्वच्छ भारत अभियान के तहत सुलभ शौचालय में अपना मूत्र विसर्जन करने गया जहाँ उसकी भिड़न्त वहाँ के रेगुलर ग्राहकों से हुई और ऐसी जगह चोटे आई जिसे यहाँ बताना उचित नहीं।

“बीना थूके पेशाब करना मक्खन बिना की ब्रेड की तरह हैं. एकदम सूखा”, एक प्रोफेशनल पेशाबी ने बताया

शौचालय के कैशियर बबलू कुमार का कहना है की मार-कुटाई तब शुरू हुई जब रमेश ने एक बार भी थुके बिना पेशाब की क्रिया पूरी कर ली जिसे देखकर सभी हक्के-बक्के रह गए।

सह-पेशाबियो को यह बात बिल्कुल भी नही जमी की कैसे एक इंसान बिना थुके सुलभ शौचालय में इतनी देर तक खड़ा रह सकता है। जन्मों-जन्मों से चलती आई इस रीत को न दोहराने के कारण लोगो ने उसकी जम कर धुनाई की जब तक उसके मुँह से सफेद झाग नही निकला।

दिनेश, पेशे से पेशाबी, जो उस वक़्त वहाँ मौजूद था और रमेश पर अपने गंदे हाथ साफ कर चुका था, घटना को विस्तार से समझाते हुए बोला, “जब भी कोई व्यक्ति पेसाब करता है तो कम से कम दो बार तो थूकता ही है। एक बार करने से पहले और एक बार करने के बाद, इसके बीच जितना भी थूके वो उसकी क्षमता और शौचालय की गंदगी पर निर्भर करता है। लेकिन बुड़बक रमेस ने एक बार भी नही थुका।”

“पहले तो हमे यह लगा की इसके मुँह में तम्बाकू होगा, सायद तभी नही थूक रहा। परंतु जब इसने कुल्ली की और मुँह में से लाल रंग की पिचकारी नही फेंकी, तो हम सभी सह-पेसाबियो को गुस्सा आया की इसने थूकने की रीत, जिस्से ओवैसी भी पलड़ा नही झाड़ सकता, कैसे तोड़ दी और सबने दो-दो हाथ लगा डाले।”



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