Monday, 23rd October, 2017

संसद में सियार

03, Aug 2017 By Abhinav Kumar Anshu

‘रंगा सियार’ वाली कहानी किसे किसे याद है? रंगा सियार पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानियों में से एक है जिसके रचयिता आचार्य विष्णु शर्मा हैं।रंगा सियार की प्रासंगिता आज के दौर में भी है। आज पुरे देश में हरे-लाल-काले-नीले-पिले-सफ़ेद में रंगे इंसान इक दूसरे की हुआँ से हुआँ मिला रहे है।औऱ इनकी धूर्तता इतने अव्वल दर्ज़े है कि रंगा सियार भी इनके आगे नतमस्तक हो जाएं।ऐसे ही इक सियार से पूछ ली-क्यूँ किसी ने मार के सूजा दी है?

मुखिया सियार जी बाकी सियरों को प्रवचन देते हुए
मुखिया सियार जी बाकी सियरों को प्रवचन देते हुए

या घोटालों से बनाई गयी तोंद को मोदीजी ने ख़ुराक रोक दी है? या तिजोरी में रखा नोट रद्दी हो गए है? मज़े में तो सब दिख रहे हो। करोड़ों की गाड़ियों से आये।चमाचम सफ़ेद कपड़ो में 2-रुपल्ली सरकार विरोधी नारे तख्तियों पर लिख गाँधीजी के सामने बेशर्मों की मुस्कुरा रहे हो।दावे के साथ कह सकता हूँ आज बापू होते तो अहिंसा छोड़ लठिया देते।

तब सियारवाल जी आलूजी खदसे कहिन से-मुर्ख जनता कहीं के सब समझने लगे हो।फिर भी हम कहेंगें इ सब समझना छोड़ दो ।एहे तो पॉलिटिक्स हे।मस्त खाओ पियो।कुछ मसला हो या न हो हुआँ हुआँ चिल्लाते रहो।बाक़ी जिनके पास सफ़ेदमनी है,बदलाव की चाहत है।धैर्य से कही कतार में खड़ा हो जात है।हम चलते है कैंटीन से सब्सिडी वाला कचौड़ी-पनीर चापने।थोड़ी देर बाद फ़िर से हुआँ हुआँ करना है। “मोदी सरकार होश में आओ”