Friday, 23rd June, 2017

साहेब की शोभा-यात्रा (भागलपुर से सिवान)

12, Sep 2016 By khakshar

बिहारी होने के खतरे तो बहुत हैं। कानून-नियम-रोज़मर्रा-शिक्षा-ट्रेन के अलावा भी, कष्ट बहुत हैं बिहारियों को। बुरा हो फ़ेकिंग न्यूज़ के संपादको, का जिन्होंने मेरे बिहारीपन का फायदा उठा कर “साहेब” की शोभा-यात्रा को कवर करने के लिए भेज दिया। कौन इन संपादको को समझाये की इसी “बहार” में कितने बिहारी युवा बाहर की तरफ बह गए।

भागलपुर से कारवाँ निगल मुंगेर पहुच गया ११ बजे  सुबह तक। साहेब ने 1100 गाड़ियों का काफिला रुकवा दिया, ऊँगली के एक इशारे पर। साहेब को चाय की तलब लगी थी। करीब चार हज़ार लोगो के लिए चाय, पानी का मुंगेर के चाय-पान वाले दुकानों पर आ पड़ी। साढ़े छः फुट वाले बॉडीगार्डस दो बोतल मिनरल वाटर तो कुल्ली में लगा दे रहे थे। साहेब फ़ोन पर लगे-लगे चाय पी रहे थे। शुभकामनाएँ और बधाइयां तो मोबाइल पर जेल में ही दो सप्ताह पहले से मिल गयी थी। ये कुछ कार्य -संबंधी फ़ोन थे। इसमें  नई “बिस्मिल्लाह” कब-कहाँ-कैसे हो इसकी बातें हो रही थी। “सुशासन की बहार” को समझाने के लिए, पटना से  किसी दुखियारे पिता-पुत्र तिकड़ी का फ़ोन आ रहा था बारम्बार। ऐसा पता चला है की इसमें एक फ़ोन बिहार की कानून मंत्री का भी था।

बहार के एगयराह घण्टे (377 किलोमीटर)
बहार के एगयराह घण्टे (377 किलोमीटर)

दोपहर के भोजन के समय काफिला बेगुसराय पहुँचा। हम पतलकारो की  फ्री-लंच वाली आदत अनुसार मैंने एक मुस्टण्डे (बाहुबली) से इंतेज़ाम के बारे पूछा। खलीफा (पहलवान) भड़क गए। बोले “ये बेगुसराय हैं चिरकुट, यहाँ साहेब की कितने घरानों से कार्यकारी रिश्तेदारी हैं।” भुख से बिलबिलाते पत्रकार ने चुप रहना ही बेहतर समझा। पैसे तो हमारी पत्रिका “फकिंग-न्यूज़” लंच के लिए भी नहीं देती।

साहेब वैशाली में एक दरगाह पर रुके। नौ विधायक उनकी लंबी उम्र ले लिए चादर लेकर वहाँ विराजमान थे। मुजफ्फरपुर पहुँचते-पहुँचते गाड़ियों की संख्या २०० रह गयी थी। टोल प्लाजा पर काफिले की किसी कार ने टोल टैक्स नहीं दिया. अब इसे लेकर बवाल मच गया है क्योंकि आरोप है कि पुलिस ने टोल नहीं लेने की कथित हिदायत दी थी।

“We had police orders to let more than 200 cars in ex-MP Shahabuddin’s convoy pass without toll…The convoy included many red beacon cars and many from the administration,” said Dipak Chaube, the toll plaza manager in Muzaffarpur, to ANI on Monday.

सफ़ेद रंगों के पटाखों से गोपालगंज में साहेब का  स्वागत हुआ। सफ़ेद पाक ईमान का रंग साहेब को बहुत पसंद है। तभी तो 1300 में से 1250 सफ़ेद गाड़ियां थी कारवां में। साहेब जब घर पहुँचे तो उनके स्वागत में कम मसाले वाला मीट-शोरबा बना था। ऐसा एक प्रतिश्ठित पत्रकार ने हमें बताया। साहेब ने उस TV पत्रकार को खाने का न्योता भी दिया। ये पत्रकार महाशय सीधा प्रतापी साहेब के गाँव “प्रतापपुर” से नौ दिन से डेरा डाले हुए थे। 377 किलो मीटर साथ चलने वाले टूटपुंजिया FN कोरेस्पोंडेंट हक्का-बक्का भी नहीं हुआ।

“पिक्चर अभी तो शुरू हुई है.. (गलत मत समझिये, साहेब के जेल से निकलने का राजनीतिक विश्लेषण वाला पोस्ट तैयार हो रहा हैं। दुआ कीजिये की अच्छे व्यंग्य को हमारे संपादक मुख्या पृष्ठ पर छापेंगे। साहेब की तहर इन संपादको के भी कुछ चहेते पत्रकार होते हैं)। वैसे एक झूठा आरोप जेल से ही पत्रकार को मरवाने का लगा है साहेब पे।

इधर हत्या-तेजाब स्नान के कई गवाह (जो गवाही देने को तैयार नहीं थे) गुनगुना रहे थे-

“आगाज़-इ-सफ़र में जब हो इतना फ़लसफ़ा; अमल-इ-हुक्मरानी पे क्यों न लगे कहकहाँ..”