Wednesday, 13th December, 2017

रसगुल्ला युद्ध में जीता बंगाल, अब होगा जंग-इ-पकवान

17, Nov 2017 By khakshar

कोलकाता- फैसला आया है कि रसगुल्ला बंगाल की मिठाई है। ओड़िशा और बंगाल दोनों ने इस मिठाई पर अपना दावा ठोका था। इस फैसले से सबसे ज्यादा खुशी बंगाल के मुख्य मंत्री को हुई हैं। ममता बनर्जी फिलहाल ब्रिटेन के दौरे पर हैं। लंदन से किए गए ट्वीट में उन्होंने कहा- “यह मीठी खबर है। हम बहुत खुश हैं और खुद पर गर्व करते हैं कि रोसोगुल्ला बंगाल का हो गया।” ममता दीदी की महानता की भी दाद देनी पड़ेगी। उन्होंने रसगुल्ले के युद्ध में अपना योगदान छिपा  लिया। इस खाद्य-युद्ध की असली विजेता वही थी। रसगुल्ला-जंग में एक प्रतियोगता हुई थी, ओड़िशा और बंगाल के खिलाड़ियों के बीच। दोनों राज्यों के मुख्य मंत्री अपने-अपने राज्य के प्रतिनिधि थे। ममता दीदी ने एक साथ मुँह में बिना निगले नौ रसगुल्ले दाब लिए थे, जबकि नवीन पटनायक सात रसगुल्ले ही चाप पाए थे।

मुँह में  नौ रसगुल्ले मुँह में बिना निगले नौ रसगुल्ले
मुँह में बिना निगले नौ रसगुल्ले

भुवनेश्वर- कई घरों मेँ फैला मातम, शहर में कर्फ्यू सी स्तिथी.

इस फ़ैसले के बाद ओड़िशा की राजधानी में मातम फैल गया हैं। इस फैसले के विरोध में  मिठाई की दुकानों ने रसगुल्ला बनाना बंद कर दिया हैं। रसगुल्ला माँगने वाले ग्राहक को शक़ की निग़ाह से देखा जा रहा हैं। जल्द ही ओड़िशा सरकार रसगुल्ला चापने वालों कि सुट्टाई के लिए कोई कानून बना सकती हैं।

दिल्ली-  कल रात दिल्ली के मुख्य मंत्री ने एक मीटिंग बुलाई थी। उन्होंने दिल्ली के अधिकारियों को निर्देश दिया हैं कि जल्द से जल्द “आलु-पराठा” का ज्योग्राफिकल इंडिकेशन टैग देश की राजधानी को दिलवाये। मुख्य मंत्री को ये शंका हैं कि कॉंग्रेस्स चुनावी चक्कर में आलु का GI टैग गुजरात को दिला देंगी।

भोपाल- मध्य प्रदेश ने पोहा को राजकीय भोजन घोषित करने के लिए कानून बनाने की सोची हैं। इस पर विरोधियों ने पोहा पर “संघी पकवान” होने का आरोप लगा दिया हैं। आज कल चुप रहने वाले एक कॉंग्रेस्सी नेता बोले- “पोहा को जैसे भी बनाओ, वो केसरिया रंग पकड़ लेता हैं। अतः ये संघी हैं।”

इधर देश में खाना पर अफरा-तफ़री का माहौल फैल गया हैं। गुजरात-उप-बिहार-राजस्थान में बेसन से बने पकवानों के लिए जंग की घोषणा हो चुकी हैं। खिचड़ी को राष्ट्रीय व्यंजन घोषित होने के बाद, उसके तीस राजकीय माता -पिता पैदा हो गए हैं। पहले खिचड़ी को सब बीमारू राज्य की देन बताते थे।

इन खबरों के चेन्नई स्थित ज्योग्राफिकल इंडिकेशन के इंस्पेक्टर अपने-अपने भगवान को चटखारे मार-मार कर के धन्यवाद दे रहे हैं।