Sunday, 19th November, 2017

रवीश कुमार के नाम एक खुली चिट्ठी

09, Jul 2016 By Ritesh Sinha

रविश जी

नमस्कार,

ओपन लेटर हमारा जन्म सिद्ध अधिकार हैं. मरते दम तक हम ओपन लेटर लिखते रहेंगें
ओपन लेटर हमारा जन्म सिद्ध अधिकार हैं. मरते दम तक हम ओपन लेटर लिखते रहेंगें

रक्षा बंधन का त्यौहार अभी आया नहीं है और आपने फिर से चिट्ठी लिखना शुरू कर दिया, जब आप किसी नेता को एक चिट्ठी लिखते हैं तो बदले में लोग आपको पचास चिट्ठी थमा देते हैं, मुझे लगता है कि राजेश खन्ना के बाद सबसे ज्यादा ख़त आपके ही नाम लिखे गए हैं, अभी कुछ दिन पहले जब आपने अपने दर्शकों को, घर बैठे अजंता-एलोरा की गुफाओं के दर्शन टीवी स्क्रीन पर कराए, तब भी आपको थोक के भाव चिट्ठी लिखे गए, और आप इतनी सारी चिट्ठी पाकर नाराज हो गए थे। आज फिर आपने एक ओपन लेटर लिख दिया है, लगता है भारत का पोस्टल डिपार्टमेंट आपके ही भरोसे चल रहा हैै। इस शुभ hyjukiiअवसर का लाभ उठाकर हमने भी सोचा कि क्यों ना एक चिट्ठी हम भी चिपका दें। आपके नाम। बिलकुल छोटा ख़त। ये लीजिए!

रविश जी, सबसे बड़ी विडम्बना ये है कि आजकल जो आपको चिट्ठी लिखते हैं, उनमे से अधिकांश लोग कभी न कभी आपके फैन रह चुके हैं, वे सभी आपका घोसला छोड़कर, दुसरे घोसले में क्यों चले गए ये तो आप अच्छे से जानते होंगे? आपने एक चिट्ठी राम जेठमलानी के नाम भी लिखी है। अच्छी है। लेकिन उसी तरह का सवाल “आपसे” भी किया जा सकता है, जो आपने राम जेठमलानी से किया था। क्या आप इतने दिनों तक ऐसे कुँए की रखवाली नहीं कर रहे थे, जो पहले से सूख चुकी है।

रविश जी, तटस्थता (impartiality) तो एक रेन-कोट की तरह हो गई है, जो बारिश के समय भीगने से बचा तो लेती है, लेकिन बाकी समय घर के किसी कोने में पड़ी रहती है। इसलिए तटस्थता (impartiality) जैसे भारी भरकम शब्दों से दूर ही रहा जाए तो बेहतर है। जो आपको पसंद नहीं करता उन सबको आपने “गाली देने वाला” मान लिया है जो सही नहीं है। इसी ज्ञान के साथ लेखनी रख रहा हूँ।

आपका, कुछ भी नहीं रितेश सिन्हा