Monday, 29th May, 2017

'राजनीती में वैरागियों के बढ़ते प्रभाव से हूँ चिंतित': श्री नारायण दत्त तिवारी

23, Apr 2017 By Dharmendra Kumar

कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में आये वरिष्ठ नेता श्री नारायण दत्त तिवारी ने वर्तमान राजनैतिक संकट पर लोगों का ध्यान खींचा है. कांग्रेस पर मंडराती राहु दशा से खुद को बचाने के लिए उन्होंने बीजेपी ज्वाइन किया था. उन्हें यह विश्वास था बीजेपी की बहती गंगा में उनका हाथ भी धुल जायेगा एवं उनके लम्बे अनुभव का लाभ उनकी नयी पार्टी को मिलेगा, बदकिस्मती से अभी तक उनकी कोई बात सही हुई ही ऐसा किसी को प्रतीत नहीं हो रहा.

एन. डी. तिवारी दुख जताते हुए
एन. डी. तिवारी दुख जताते हुए

माननीय श्री आडवाणी जी को सेट करने लिए बनायी गयी ‘मार्ग दर्शक मंडल’ की सदस्यता बढ़ नहीं रही थी और और सत्ता की मुख्य धारा से अलग-थलग पड़ते सदस्यों का जी लगा रहे, इसका बीजेपी लगातार प्रयास कर रही थी. श्री तिवारी का बीजेपी ज्वाइन करने के साथ ही माननीय अमित भाई शाह का हेतू संभव हुआ और उन्होंने चैन की सांस ली। समस्या तब शुरू हुई जब कुछ महीने प्रतीक्षा करने के बाद श्री तिवारी ने अपने तेवर साफ़ करते हुए अपने हाल के प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “मुझे न कभी परदे के पीछे रहने की जरूरत पड़ी है और न ही मैं रहूँगा। बीजेपी को मेरी उपेक्षा करना भारी पड़ सकता है. मैं शत्रुघ्न सिन्हा नहीं हूँ की ‘खामोश’ बैठूंगा।”

उन्होंने देश की वर्तमान राजनीती पर समीक्षा करते हुए कहा की भारत की लोकतान्त्रिक परंपरा में वैरागियों का न कभी वर्चस्व रहा है और न ही भविष्य में होना चाहिए। बकौल उनके, ‘मेरा विरोध वैरागिओं से नहीं है अपितु मै तो यह चाहता हूँ की उनकी संख्या बढे. वैसे मेरे ना चाहने से भी उनकी संख्या बढ़ने ही वाली है.’ पत्रकारों ने जब यह पूछा की ऐसा कैसे संभव है, तब उन्होंने सफाई दी, “हरियाणा, पंजाब या फिर पूरे देश में जिस हिसाब से लिंगानुपात कम हो रहा, लोग अपना गृहस्थ जीवन प्रारम्भ ही नहीं कर पाएंगे। अब जब शादी के लड़की ही नहीं मिलेगी तब वैराग के सिवा रास्ता क्या रह जायेगा। हमारे जमाने की बात थोड़े ही है.”

“राजनीती में बढ़ते ‘वैरागियों के वर्चस्व’ से मेरा तात्पर्य उस परिस्थिति से है जब देश की सत्ता ऐसे लोगों के हाथों में चली जाए जिनका यथार्थ से ज्यादा वास्ता नहीं हो। ‘गृहस्थ जीवन को जीना और सबकुछ संभाल के चलना’ जैसे गुण वैरागी सीख ही नहीं सकता। ‘जाके पैर न फटे बेवाई, सो क्या जाने पीड़ परायी’ वाली हालत होकर रह जाएगी.”  उन्होंने यह भी जोड़ा की, “माननीय राहुल गाँधी को भी अगर आगे बढ़ना है तो सिर्फ बैंगकॉक जाकर समय व्यर्थ न करें। आगे बढ़ें और विवाह कर लें’.  श्री आदित्यनाथ योगी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘ अपवाद सब जगह होते हैं, मैं इससे आश्चर्यचकित नहीं हूँ.”