Tuesday, 21st November, 2017

राजीव गाँधी के सपनों की कहानी उन्ही की ज़ुबानी

22, Aug 2013 By idiot420

राजीव जी ने एक सपना देख था बस एक बार और कॉंग्रेस उन्हे देश को दिखा रही है बार बार| अगर आज राजीव गाँधी होते तो अपने सपनों के साथ कॉंग्रेस की बेफ़िज़ूल आशिकी देख के शायद यही गुनगुनाते..

राजीव गाँधी
राजीव गाँधी

देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए दूर तक निगाहों में थें ब्रिड्ज बने हुए

यह गीला है खुद की निगाहों से नाज़ाने कब इतने सारे ख्वाब देख लिये

देखा एक ख्वाब…..

सारे प्रॉजेक्ट्स में बसी खुशबू मेरी कॉंग्रेस, यह तेरे प्यार की है जादूगरी

मेरी ही शक्ल है हरेक प्रचार में चापलूसी का रंग है फ़िज़ाओं में

तेरे हर बकवास में मेरे गीत हैं मिले हुए क्या कहूँ कि शर्म से हैं लब सिले हुए

देखा एक ख्वाब…

मेरा नाम है तेरी पनाहों में ब्क्श दे अब मुझे मेरे ख्वाबों से

तेरा पंजा है अब निगाहों में दूर तक अंधेरा ही है राहों में

कल अगर ना रोशनी के काफिले हुए भ्रष्टाचार के हज़ार दीप हैं जले हुए

देखा एक ख्वाब…