Friday, 23rd June, 2017

रेलवे बजट अलग से नहीं हुआ पेश: रेल मंत्री बीमार

08, Feb 2017 By khakshar
एक प्रभु दो ब्रीफ़केस: बहुत नाइंसाफी हैं 
एक प्रभु दो ब्रीफ़केस: बहुत नाइंसाफी हैं

रेलवे बजट पर केंद्र सरकार ने बैठे-बिठाए एक पंगा ले लिया हैं। रेलवे मंत्री सकते में आ गए हैं। यात्रियों के ट्वीट भी नहीं देख पा रहे हैं। इस कारण कितने छोटे, नन्हें-मुन्नों को दुध, डायपर आदि मिलना बंद हो गया हैं। ऊपर से कैबिनेट के बैठक में वित्त मंत्री ने चुटकी ले ली। “हमने तो इस बजट में सरकार को आलोचना से बचा लिया। रेल मंत्रालय को अपनी बपौती मानने वाले बिहार और बंगाल के नेता भी कुछ नहीं बोल पा रहे।” सड़क मंत्री भी कमज़ोर खुरापाती नहीं हैं। रोज़ाना पाँच किलोमीटर रोड बना के इक्कीस किलोमीटर का ढ़िढोरा पीटने वाले हैं। मीटिंग में वह भी मौजूद थे और समोसों का इंतेज़ार कर रहे थे। मंद-मंद मुस्कुराते हुए बोल पड़े, “अब तो सड़क का बजट, रेल के बजट से ज्यादा हैं, रेल तो अब न अपने भरोसे है न प्रभु भरोसे।”

इसके अलावा सूत्र  बताते है कि रेल कर्मचारियों ने हड़ताल की धमकी दे डाली हैं। रेल यूनियन के नेता “निठ्ठले राय” अपनी वेदना छुपा नहीं पा रहे थे। “पुरे समाज में हमारी नाक कटा दी हैं प्रभु ने। पहले तीन महीने पहले से नाते-रिश्तेदार पूछते थे कि इस बजट में बहादुरगढ़-पहाड़पुर वाली पैसेंजर चालू होगी की नहीं। अब तो कोई पूछता ही नहीं। अख़बार वालों ने एक पलांग भी नहीं छापा रेलवे-बजट के बारे में। ये रेल के साथ ना-इंसाफी हैं,अन्याय हैं। हद तो तब हो गई जब एक नए सांसद ने संसद में रेल मंत्री को पिन मार दिया। अब तो रेल भी प्रभु भरोसे नहीं हैं।” इतना सब सुनने के बाद धरती तो नहीँ फटी, न ही कोई रेल ट्रैक उखड़ा या उखाड़ा गया। अल्बत्ता रेलवे मंत्री के निजी सचिव ने बताया कि मंत्री जी की तबियत थोड़ी ख़राब हैं।

रेल मंत्री  ” प्रभु , मनोज सिन्हा और राजेन  गोहाईं “की लंबी उम्र और सदा -स्वस्थ रहने की प्रार्थना के साथ।