Wednesday, 13th December, 2017

पानी को भाप बनने से रोकने में मिली सफलता के बाद श्री राजू राजस्थान में रोकेंगे धूप

24, Apr 2017 By Dharmendra Kumar

भयंकर सूखा झेल रही तमिलनाडु में पानी के लिया सर्वत्र हाहाकार मचा हुआ है. पानी कैसे बचाया जाए इसके नए-नए तरीके ढूंढें जा रहे हैं. कोई पानी का इस्तेमाल कम कर रहा है तो कोई पानी को बर्बाद होने से बचाने में लगा हुआ है. तमिलनाडु सरकार में मंत्री श्री सेल्लुर के. राजू ने इस पहल को नयी ऊंचाई तब दे दी जब उन्होंने वैगई डैम के पानी को सूरज की बुरी निगाहों से बचाने का प्रण ले लिया। ‘सूरज की तेज रौशनी से बड़ी मात्रा में साफ़ पानी भाप बनकर उड़ जाता है’ का पाठ जो स्कूल में पढ़ा था उसकी प्रासंगिकता उन्हें एकाएक समझ आ गयी. ‘देर आयद, दुरुस्त आयद’. सरकारी खजाने से आनन-फानन में १० लाख रूपये निकाले गए और बड़ी मात्रा में थर्मोकाल खरीदा गया.

के. राजू की उपलब्धि
के. राजू की उपलब्धि

अगली सुबह सूरज की भृकुटि चढ़े इससे पहले ही मंत्री साहब अपने सरकारी लश्कर के साथ आये और पूरी झील को ढँक दिया। हवाओं  को उन्होंने पूरी तरह चकमा दे डाला और जब तक वे थर्मोकॉल शीट्स का कुछ बिगाड़ पाते पूरी झील का पानी सुरक्षित हो चुका था. इसका सबसे बड़ा लाभ उन मछलियों और जलीय जीवों को मिला जिनके पास न तो ऐरकण्डीशण्ड की सुविधा थी और न ही उनके बारे में कोई सोचने वाला। मछलियों और मगरमच्छों की दुआएं लेकर वे लौट ही रहे थे की पूरी दुनिया भर से शुभकामनाओं के कॉल्स आने शुरू हो गए. शशिकला के ‘विधायकों को रिसोर्ट में नज़रबद करने के बाद’ यह पार्टी की सबसे क्रिएटिव पहल थी. और इसका लाभ उन्हें तमिलनाडु में चल रहे ‘कौन रहेगा मुख्यमंत्री’ में मिलेगा, ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं.

बकौल श्री सेल्लुर के. राजू, ‘आइडियाज किसी का जागीर नहीं होता, मैंने आज यह प्रूव कर दिया की एक मंत्री भी क्रिएटिव होने को सकता अगर उसको मौका मिलेंगा तो. मैं अपना इस इनिशिएटिव को पूरे वर्ल्ड के सामने रखना, ऐसा सोचा। यह पूरी ह्यूमैनिटी के लिए मेरी तरफ से छोटा सा गिफ्ट।’

यह पूछे जाने पर की उनको जब दुनिया भर से कॉल आ रहे हैं नासा से भी बुलावा आया है तो फिर उन्होंने राजस्थान को ही क्यों चुना। वे भावुक होते हुए बड़ी सरलता से बोले, ‘इंडिया में काम इजी होना। बाहर बहुत मच-मच. और फिर मेक इन इंडिया कैसा सक्सेस होगा’. राजस्थान के लिया उनका प्लान बहुत सीधा है, एक बहुत बड़ी काली प्लास्टिक की व्यवस्था की जाए और पूरे थार रेगिस्तान को उससे ढँक दिया जाये।

‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है.’