Friday, 24th November, 2017

एक बैंक चोर की कहानी जो आम आदमी का मसीहा बन बैठा

06, Mar 2015 By Shailesh Kaushik

एक बार चोरों का एक गिरोह बैंक में गया। चोरों के मुखिया ने एक विशेष मुखौटा लगाया था। उसने बोला की हम बैंक का पैसा चुराने आये हैं जनता का नहीं, इसलिए हमें कोई ना रोके क्योंकि इसमें किसी का भला नहीं होगा।

सभी ये सुनकर शांत रहे। उसने पैसा चुराया और बाहर निकल गए। बाहर निकले तो देखा की पुलिस आ गयी थी। ये देखकर उस मुखौटे वाले चोर ने थोड़ा सा पैसा हवा में उड़ा दिया। बाहर जो लोग बिना किसी काम के खाली बैठे थे, मुफ्त के पैसे पर टूट पड़े। जिससे पुलिस और चोर के बीच में वो आ गए। इन खाली लोगों को ढाल बनाकर वो मुखौटे वाला चोर भाग निकला।

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एक चोर जो आम लोगों का मसीहा बन बैठा

अगले दिन पूरे शहर में खबर फ़ैल गयी की एक मुखौटे वाला मसीहा आया है जो अमीरों से लूटकर गरीबों में बांटता है। ये खबर उस चोर तक भी पहुंची तो उसने सोचा की इतना आसान तो चोरी करना कभी भी नहीं था पहले। तब उसने सोचा, क्यों न हर बार यही किया जाए – चोरी करें और मुफ्त का पैसा बांटकर बचते रहे। चोरी भी चल रही है और जनता पूज भी रही है।

अब वो यही करने लगा कि चोरी करने से पहले ही एलान करवा देता था की कब और कहाँ चोरी करेंगे। पुलिस भी कुछ नही कर पाती थी क्योंकि मुफ्त का पैसा समेटने वाली जनता हमेशा बचाव करने पहुंच जाती थी। और अगर पुलिस पकड़ने की कोशिश करती तो उसे गरीब विरोधी और भ्रष्ट कहा जाता। और मसीहा को गरीबों का हमदर्द।

धीरे धीरे मसीहा के काफी अनुयायी हो गए। कुछ नए पुराने चोर भी उससे आ मिले जिससे सबका धंधा चलता रहे और बढ़ भी जाये। बहुत से लोग काम धंधे छोड़कर बस बैंकों के बाहर ही बैठे रहते थे की काम नहीं करेंगे बस मसीहा आएगा और पैसे बांटेगा। इसके चलते सभी उद्योग धंधे ठप पड़ने लगे और बैंक खस्ताहाल होने लगे।

पर जब भी बैंक के निर्देशकों या उद्योगपतियों ने शिकायत करनी चाही तो ये बोला गया की ये भ्रष्ट लोग हैं और सभी अनुयायी भी मसीहा की बात की दोहराते रहते थे। कुछ तार्किक लोगों ने बोला की मसीहा कानून तोड़ रहा है तो मसीहा ने कानून को ही ख़राब बता दिया। उसने कहा की ये तो अमीर लोगों का कानून है। वर्ना बैंक लूटना कोई गलत कार्य नहीं है। जो बैंक लूटने का विरोध करते हैं वो गरीब विरोधी हैं।

मसीहा का अपार समर्थन होने के कारण पुलिस भी कुछ नहीं कर पायी। धीरे धीरे बैंक खस्ता हाल हो गए और उन्होंने खुद को दीवालिया घोषित कर दिया। जिससे उन सभी लोगों का पैसा डूब गया जिन्होंने मेहनत करके बैंक में जमा किया था। इससे वो लोग बड़े आहत हुए की उन्होंने जो कुछ मेहनत से कमाया उसे मसीहा ने हवा में उड़ा दिया। उद्योग धंधे पहले ही बंद हो चुके थे।

अंत में :

1. मसीहा के चोरी करने के लिए अब बैंक नहीं बचे थे तो उसने अपने अनुयायिओं से कहा की अब बैंकों में कोई पैसा नहीं डाल रहा क्योंकि वो मसीहा से डर गए हैं। सबके सब मिले हुए हैं और गरीबों के खिलाफ साज़िश कर रहे हैं। उसने इससे उद्योगपतियों और बैंकों की साज़िश बताया।

2. मेहनत करने वाले सभी लोग वो राज्य छोड़ कर चले गए जहाँ मसीहा का प्रभाव था। किसी ऐसे जगह पर जहाँ उन्हें अपनी मेहनत का सही मूल्य मिल सके।

3. जिन्होंने हवा में उड़ा पैसा समेटा था वो आज भी सड़क पर ही बैठे हैं क्यूंकि मुफ्तखोरी का पैसा आलसी और उद्दंड ही बनता है। वो पैसा न टिका और न कभी टिकेगा।

(A story by Shailesh Kaushik. Reach author at shellk007@gmail.com)