Wednesday, 16th August, 2017

मर्सी गाने के लिए बादशाह को मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार

01, Jun 2017 By नास्त्रेदमस

badshah-translated-his-songs-into-english980-1491907479_980x457वैसे तो बादशाह ने DJ वाले बाबू गाने से पहले भी बहुत धूम मचाई है मगर मर्सी गाने के बोल सुनने के बाद गुलज़ार साहब ने स्वयं बादशाह का नाम साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए मनोनित किया था। गुलज़ार साहब का कहना है कि यह गाना सिर्फ एक गाना नहीं है, नई पीढ़ी की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है।

“माँ ने तुझे बड़ा किया क्या खिला कर..” यह पंक्तिया दर्शाती है किन मुश्किलों से गुज़रके माँ अपनी बेटियों को खिलाती है और बड़ा करती है.. गुलज़ार साहब का कहना है कि बहुत दिनों बाद किसी लेखक की लेखनी में इतनी गहरी भावनायें देखने को मिली है और ये हिंदी और उर्दू साहित्य के लिये अती हर्ष का विषय है।

जावेद अख्तर साहब ने भी बादशाह को बधाई दी और कहा कि बहुत दिनों बाद किसी गाने को सुनके आंख में आंसू आ गये, माँ की याद दिलाता है ये गाना।

इसी बीच ढिंचेक पूजा के फैंस ने अपील की है कि इस साल साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार ढिंचेक पूजा देवी को ही मिलना चाहिए । “सेल्फी मेने लेली आज” गाने ने साहित्य और संगीत की दुनिया में एक नया मुकाम बनाया है और रबिन्द्र संगीत की तर्ज़ पे ढिंचक पूजा के फैन इनके गानों को ढिंचेक संगीत कहके बुलाते हैं।