Monday, 23rd October, 2017

केजरीवाल के सूखते हुए कच्छों पर अज्ञात लोगों ने फेंका पानी, केजरीवाल ने कहा, "मुझे नीमोनिया से मारने की साजिश हो रही है"

20, Jan 2016 By cobratanktimes

दिल्ली को दहला देने वाली यह घटना कल मुख्यमंत्री निवास की है जहाँ बरामदे में सूख रहे केजरीवाल के धारी वाले कच्छों पर अज्ञात युवकों ने लोहे की बाल्टियों से हमला कर, उन्हें पानी-2 कर दिया। विश्वसनीय सूत्रों से ये भी पता चला है की करीब 7 मिनट तक चली इस वारदात में पास ही सूख रहे बनियान और तौलिये को भी काफी छींटे पड़े हैं। इस पूरी वारदात के दौरान सभी घर वाले सो रहे थे और इस अनहोनी का पता उन्हें सुबह उस वक़्त चला जब केजरीवाल जी खुद अपने कच्छे पलटने गये।

स्थानीय थाना अधिकारी का कहना है की, “पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज़ कर जांच शुरू कर दी है, और मेरी लोगों को सलाह है की जब तक अपराधी पकड़े नहीं जाते कृपया अपने कच्छे और बाकी कीमती कपड़े घर के अंदर ही सुखाये।”

केजरीवाल के कच्छों की प्रेस कान्फरेन्स
केजरीवाल के कच्छों की प्रेस कान्फरेन्स

इस मौके को भुनाने के लिए रखी गयी प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरी जी ने कहा, “दोस्तों ये जो मैं आप लोगों के सामने जीवित खड़ा हूँ, यह एक चमत्कार से कम नहीं है। वरना अगर मैं जल्दबाजी में वो गीले कच्छे पहन लेता तो मेरे दुश्मनों की मुझे निमोनिया करवा कर मारने की साजिश कामयाब हो जाती। भाइयों ये कोई आम छींटाकसी की घटना नहीं थी, ये एक बहुत सोची समझी साजिश थी। सबको पता है की मैं भी एक आम आदमी हूँ जिसके पास पूरे हफ्ते बदल-2 कर पहनने के लिए सात कच्छे नहीं होते। मैं भी आपकी तरह “कच्छे दो ही अच्छे” के सिद्धांत पर चलता हूँ और इसी बात का फायदा उठाते हुए हमला उसी रात हुआ जब मेरे दोनों कच्छे बाहर सूख रहे थे।”

इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब एक पत्रकार ने पुछा, “केजरी जी अगर आपके दोनों कच्छे गीले है तो, अभी आपने किसका कच्छा पहन रखा है?” तब इस सवाल का जवाब देने से पहले ही आशुतोष जी ने माइक छिन लिया और चाय पकोड़े की स्टाल चालु होने की घोषणा कर प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त कर दी।

बहारहाल इस मुददे पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “यह सब न्यूज़ में बने रहने के लिए ड्रामेबाज़ी है, वरना साहब हम भी कच्छे बनियान वाले हैं। हमारे घर में भी कच्छे सूखते हैं। उन पर तो किसी ने आज तक पानी नहीं डाला। एक बात मैं केजरी जी से पूछना चाहूँगा कि इतनी रात को आखिर कच्छे बाहर क्यों सूख रहे थे? क्या उनको इतना भी नहीं पता था की दिल्ली में इन दिनों कितनी ओस पड़ती है, कच्छे तो वैसे भी गीले होने ही थे। यह सब उनकी पोलिटिकल स्टंटबाजी है और कुछ नहीं।”