Tuesday, 23rd May, 2017

कसाई खानों के बंद होते ही बढ़ा बकरों का आतंक

01, Apr 2017 By Dharmendra Kumar

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही अवैध कसाई खानों पर पहली गाज गिरी है. लखनऊ निवासी जुम्मन मियां के पुश्तैनी धंधे पर अचानक ऐसी आफत आएगी, उन्होंने सोचा न था. अधिकारियों को हफ्ता टाइम पर जाता था फिर भी ऐसा हुआ. बकरों को जन्नत भेजने के काम में वे ऐसे फंसे रहे की लाइसेंस के बारे में उन्होंने कभी सोचा ही नहीं। लेकिन वो कहते हैं न “बकरे की अम्मा भला कब तक खैर मनाएगी” वाली परिस्थिति आन पड़ी है. अब वे कमाने दिल्ली जाएँ या सरकार से लड़ें समझ नहीं आ रहा.

"मोदी जी और योगी जी का ये उपकार हम पे हमेशा रहेगा"
“मोदी जी और योगी जी का ये उपकार हम पे हमेशा रहेगा”

दूसरी तरफ बकरों ने परिस्थिति का पूरा फायदा उठाते अपने आप को लामबंद कर लिया है. राह चलते लोगों को परेशान करने की सारी भरास पूरी कर रहे हैं. अमीनाबाद में घास ले जा रही एक बैलगाड़ी को उन्होंने  दिनदहाड़े लूट लिया। पलक झपकते ही बकरों ने न सिर्फ घास लूटी बल्कि गाड़ीवान को भी मिलकर कूट दिया। सस्थानीय पुलिस ने बकरों के इस बढ़ते अपराध का संज्ञान तो लिया है लेकिन अभी तक किसी तरह की कार्रवाई हुई हो, इसकी सूचना नहीं है.

“सपा सरकार द्वारा शुरू की गयी ‘डायल १००’ अभियान का कोई फायदा आम जनता को नहीं मिल पा रहा है क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट पर लिए गए कर्मचारी बकरों के आतंक से खुद ऑफिस नहीं पहुँच पा रहे, वे बेचारे किसी की क्या सुनेंगे।” लखनऊ के ही कसाईखाने मोहल्ले की एक महिला ने हमें यह बताया। उन्होंने आगे बताया की किस तरह बकरों की तादाद शहर में बढ़ती जा रही है और घर से निकलना कितना मुश्किल हो गया है.

सब्जी वाले मनोहर भैया का अलग रोना था, “लखनऊ में मीट मिलना दुर्लभ हुआ तो हमें लगा की हमारी चांदी होगी, लेकिन इन बकरों ने सारे किये कराये पर पानी फेर रखा है.” उन्होंने आगे कहा, “ये नामुराद न सब्जी बेचने दे रहे, न खाने। चार दिन हो गए सब्जी देखे हुए, हम कहा जाएँ।”

वहीँ बकरों  के लीडर ने हमें अपने आंदोलन को सही ठहराते हुए कहा, “आजतक इंसानों ने हमें बकरा बनाया है, अब बकरों की बारी है…”

आशा है सरकार लोगों की सुध लेगी।