Saturday, 21st October, 2017

जेएनयू में अमिताभ का पहला हफ्ता, नाराज़ छात्रों ने गुपचुप मांगी शाहरुख से मदद

06, May 2016 By kvimal7

फे. न्यू. ब्यू., मई ३, २०१६। तमाम उठापठक के बाद भी जेएनयू में बवाल कम होने का नाम नहीं ले रहा। छात्रों को वापस अनुशासन में लाने के उद्देश्य से प्रशासन ने पिछले हफ्ते अमिताभ बच्चन को उपकुलपति नियुक्त किया। गत मंगलवार को श्री बच्चन ने एक हफ्ता पूरा किया। अमिताभ साहब के पहले हफ्ते का फीडबैक लेने के लिये हमारी फेकिंग न्यूज़ टीम जेएनयू कैम्पस पहुँची।

अनुशासन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्य गेट पर ही हमारे संवाददाता भटूरे लाल को गार्ड ने बच्चन साहब के आदेशानुसार बिना कुछ पूछे रोक दिया और कहा कि पहले वह उस आदमी का साइन लेकर आएं जिसने उन्हें यहाँ भेजा है। चूंकि भटूरे लाल पूरी तैयारी से निकले थे, इसलिए उन्हें प्रवेश मिल गया।

स्टूडेंट असेम्बली में स्टूडेंट पर नाराज़ श्री बच्चन
स्टूडेंट असेम्बली में स्टूडेंट पर नाराज़ श्री बच्चन

भटूरे लाल के अनुसार पूरे कैम्पस में चारों तरफ़ सन्नाटा था। स्टूडेंट असेम्बली में श्री बच्चन का सम्बोधन चल रहा था। ‘अनुशासन’, ‘परम्परा’, ‘प्रतिष्ठा’, ‘पराकाष्ठा’, ‘दुनिया दी ठा ठा ठा’ जैसे शब्दों के साथ श्री बच्चन ने अपना सम्बोधन समाप्त करते हुए छात्रों से अंत में पूछा यदि उनके मन में कोई प्रश्न हो तो पूछे।

भटूरे लाल के अनुसार एक छात्रा ने हाथ ऊपर उठा कर कुछ पूछना चाहा तो श्री बच्चन ने भड़कते हुए कहा, “श्रीमती सलमा! क्या आपको जेएनयू की संस्कृति, यहाँ की कार्यशैली, यहाँ की परंपरा का ज्ञान नहीं है? आपके सगे सुपुत्र मोहम्मद अफ़रोज़ अब आपकी ही कक्षा में पढ़ते हैं। क्या अपनी अगली पीढ़ी को विरासत में यही संस्कारहीनता और अनुशासनहीनता देकर जाना चाहती हैं?” (ताजा समाचार मिलने तक उक्त छात्रा को एम्स से छुट्टी मिल चुकी है।)

कैम्पस के माली गजरौला प्रसाद ने हमारे संवाददाता भटूरे लाल को बताया, ”अफजल जिंदाबाद’ के नारे तो छोड़िये सर, अब तो हिमेश रेशमिया का ‘तनहइयाँ’ भी बैन है। अब तक तीन सौ छात्रों के मोबाइल फोन जब्त पड़े हैं चार दिनों से।” श्री गजरौला प्रसाद ने बताया कि छात्र रोष में हैं और उन्होंने गुपचुप शाहरुख खान को एक पत्र लिख कर उन्हें भी जेएनयू से जुड़ने की अपील की है। गौरतलब है कि श्री बच्चन के अनुसार इंटरनेट का उपयोग कॅालेज परिसर में करना कदाचार है। हमारे संवाददाता भटूरे लाल ने श्री बच्चन से मिलने की भरपूर कोशिश की। लेकिन पर्याप्त लोगों के साइन न होने की वजह से बात नहीं बन पाई