Saturday, 25th November, 2017

हॉस्टल के विज्ञापन से प्रभावित होकर घर छोड़ा

18, Aug 2013 By Pratik Purohit

विज्ञापन जिसे देखकर घर छोड़ दिया

इंदौर: विज्ञापन देखकर लोगो को टूथपेस्ट, साबुन आदि बदलते हुए तो आपने जरूर देखा होगा लेकिन यहा के आज़ाद नगर निवासी मोहन शर्मा ने एक हॉस्टल के विज्ञापन को देखकर घर छोड़ने का फैसला कर लिया। हालाकी हॉस्टल का विज्ञापन शहर मे बाहर से पढ़ने के लिए आने वाले छात्रो को ध्यान मे रखकर बनाया गया था लेकिन विज्ञापन मे बताई गई सुविधाओ को पढ़कर आज़ाद नगर निवासी मोहन शर्मा अपने आप को रोक नहीं पाये।

एक बार अपने फैसले को अपनी पत्नी को बताने के बाद, कामवाली बाईयो के नेटवर्क के द्वारा मामले को पूरी कॉलोनी मे फैलने मे कुछ घंटो का ही वक़्त लगा। अगले कई घंटो तक कई घरो मे ग्रुप डिस्कशन हुए। विश्वनीय सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार कुछ पड़ोसियो के अनुसार शर्मा जी ऐसा अपनी पत्नी से छुटकारा पाने के लिए कर रहे है तो वही कुछ को शक है की उनकी पत्नी ने ही उन्हे घर से निकाल दिया है और सम्मानजनक विदाई के लिए ये बहाना बनाया जा रहा है। कुछ बुजुर्गो के अनुसार हर मामले की तरह यह सब भी कलयुग का असर है। वही शर्मा जी की संगीत साधना से परेशान कुछ पड़ोसी उनके फैसले से काफी खुश दिखे।

मामले की कई घंटो से तहक़ीक़ात कर रहे फेकिंग न्यूज़ के खोजी पत्रकार फेकुलाल को उस वक़्त बड़ी सफलता मिली जब उन्होने शर्मा जी को कॉलोनी की एक किराना की दुकान पर कुछ खरीदते हुए देखा। गूंगे व्यक्ति से बातचीत करने का माद्दा रखने वाले फेकुलाल ने यह मौका नहीं खोया और लगे हाथ शर्मा जी का साक्षात्कार ले लिया। पेश है साक्षात्कार के मुख्य अंश :

फेकुलाल : नमस्ते शर्मा जी, मै फेकुलाल, नाम तो सुना होगा, हॉस्टल जाने की तैयारी कर रहे हो?

शर्मा जी (आश्चर्य के साथ): तुम्हें कैसे पता चला हॉस्टल के बारे मे…?

फेकुलाल : सबको पता है सिर्फ मुझे नहीं…

शर्मा जी (थोड़े गुस्से के साथ) : ये अंजलि भी ना…

फेकुलाल : अंजलि कौन…?? आपकी पत्नी…

शर्मा जी (झल्लाकर) : नहीं, मेरे घर पर रोज़ आने वाली कामवाली बाई का नाम है… लेडी जेम्स बॉन्ड…

फेकुलाल : आप घर क्यो छोड़ कर जा रहे हो?

शर्मा जी (चेहरे पर गंभीर भाव के साथ) : सत्य की तलाश मे, जिस तरह से सिद्धार्थ अपनी पत्नी और बच्चे को छोड़कर जंगल मे चले गए थे। वही सिद्धार्थ बाद मे गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए। अब आजकल जंगल तो बचे नहीं, एक दिन नवयुग हॉस्टल का विज्ञापन देखा तो सोचा जंगल नहीं तो यही सही…

फेकुलाल (चेहरे पर सांतवना के साथ, शर्मा जी के कंधे पर हाथ रखकर) : मै आपका दुख समझ सकता हूँ, आपका case तो बहुत complicated लगता है। अब सच सच बताइये…

शर्मा जी (चेहरे पर फीकी मुस्कान के साथ) : अरे ऐसा कुछ भी नहीं है। (जेब मे रखा हुआ विज्ञापन दिखाते हुए) ये देखिये 24 घंटा बिजली और पानी, पूरे 24 घंटा पानी-बिजली और इसका अलग से बिल भी नहीं है। ये वादा तो राजनीतिक पार्टिया भी अपने घोषणा पत्र मे करने से हिचकिचाती है। ये तो हर भारतीय का सपना रहा है, 1947 से अब तक और आगे कितने सालो तक रहेगा पता नहीं। आगे देखिये, ताज़ा एवं स्वादिष्ट खाना, कुछ लोग तो सारी ज़िंदगी शाम को सुबह और सुबह को शाम के खाने के बारे मे सोचकर ही निकाल देते है। हालकी रविवार की शाम को खाना नहीं मिलेगा लेकिन यही तो बहाना है बाहर का कुछ खाने का… इसके आगे देखिये फ्री इंटरनेट है, नया फ़र्निचर है, जिम है और रीगल सिनेमाघर से तो बिलकुल पास है। इतने वादे तो मेरी पत्नी ने भी मुझसे शादी से पहले नहीं किए थे।

फेकुलाल : तो फिर वो क्या था सत्य की खोज और गौतम बुद्ध…

शर्मा जी : आप अभी तक नहीं समझे…? यही सब तो है आजकल के जमाने का सच….सुविधाओ के पीछे भागता हुए इंसान…