Wednesday, 13th December, 2017

हिंदी साहित्य के 110 खेमों के 400 लेखकों का एलान: जब भी उन्हें अवार्ड मिलेगा, वे लौटा देंगे

08, Oct 2015 By A. Jayjeet

नई दिल्ली। अशोक वाजपेयी द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने के बाद हिंदी के उन लेखकों में साहित्य अकादमी सहित अन्य तमाम अग्रिम पुरस्कार लौटाने की होड़ लग गई है, जिन्हें उम्मीद है कि आने वाले कुछ वर्षों में वे इन अवार्ड के पात्र हो सकते हैं। हिंदी साहित्य के़ 112 खेमों के 400 से भी अधिक साहित्यकारों ने अग्रिम पुरस्कार लौटाने की घोषणा की है।

अवॉर्ड लौटने के लिए भी मिल सकते है अवॉर्ड
अवॉर्ड लौटने के लिए भी मिल सकते है अवॉर्ड

अशोक वाजपेयी के घोर विरोधी साहित्यकार रघुसिंह प्रसाद ने अग्रिम साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा करते हुए कहा, “अशोक वाजपेयी से भी पहले साहित्य अकादमी अवार्ड मुझे मिलना था। कुछ लोग जोड़-तोड़ कर ऐसे अवार्ड ले लेते हैं। इनका साहित्य से कोई लेना-देना नहीं होता। ऐसे अवार्ड लौटाने का कोई औचित्य नहीं है। मैं तो वह अवार्ड लौटाने का एलान करता हूं जिसे पाने का मैं हकदार था, हकदार हूं और हकदार रहूंगा। मुझे जब भी यह अवार्ड मिलेगा, मिलते ही यह अपने आप सरकार के पास वापस लौट जाएगा।”

रघुसिंह प्रसाद के इस एलान के तत्काल बाद उनके विरोधी खेमे के एक जाने-माने हिंदी साहित्यकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “रघुसिंह की मंशा अगर वाकई अवार्ड लौटाने की होती तो वे अग्रिम ज्ञानपीठ अवार्ड लौटाने की घोषणा करते। रघुसिंह जैसे लोग केवल दिखावा करते हैं। मैं एलान करता हूं कि जब भी मेरी कृति को ज्ञानपीठ अवार्ड मिलेगा, मैं उसे तत्काल लौटा दूंगा।”

खबर लिखे जाने तक हिंदी साहित्य के़ 112 खेमों के 411 साहित्यकार अग्रिम पुरस्कार व सम्मान लौटाने की घोषणा कर चुके थे। इस बीच, अशोक वाजपेयी ने एक बयान जारी कर कहा है कि इन सभी 411 साहित्यकारों का उनके खेमे से कोई ताल्लुक नहीं है। इन सभी ने सस्ती लोकप्रियता बटोरने के लिए यह कदम उठाया है। इनके विरोध स्वरूप मैं साहित्य अकादमी अवार्ड को लौटाने के निर्णय पर पुनविर्चार कर सकता हूं।

नाम पर विचार तक न करें, नहीं तो मुश्किल होगा :

लेखक प्रो. शांताप्रसाद शुक्ला ने तो एक कदम आगे बढ़कर साहित्य अकादमी को पत्र लिखकर कहा है कि वह अवार्ड के लिए उनके नाम पर विचार तक न करें। पत्र में शांताप्रसाद ने लिखा, “मैं सेक्युलरिज्म में विश्वास करता हूं। ऐसे में मोदी सरकार के कार्यकाल में कोई भी अवार्ड लेना मेरे सेक्युलरिज्म के सिद्धांतों के खिलाफ जाएगा। इसलिए आग्रह है कि मेरे नाम पर विचार तक न किया जाए, क्योंकि एक बार अवार्ड की घोषणा होने के बाद उसे लौटाना ठीक नहीं होगा। हिंदी सनातन संस्कृति में दान दी हुई चीजों को लौटाना अशुभ माना जाता है।” हालांकि उन्होंने आगे यह भी साफ कर दिया है कि इसके बाद भी अगर अकादमी को लगता है कि उन्हें यह अवार्ड लेना ही चाहिए तो हिंदी साहित्य के दीर्घकालीन हितों के मद्देनजर वे अपने सिद्धांतों को कुछ समय के लिए शिथिल करने पर विचार कर सकते हैं।