Thursday, 17th August, 2017

फिल्मों में "कुत्ते की औलाद" डायलॉग को सेंसर ने किया बैन, "कुकुरपुत्र" शब्द हो सकेगा इस्तेमाल

16, May 2016 By Pagla Ghoda

नई दिल्ली: एक लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद कुकुर समुदाय ने आखिरकार “कुत्ते की औलाद” वाक्यांश को सभी बॉलीवुड फिल्मों से बैन करवा दिया है| डॉगीज़ एसोसिएशन ऑफ़ एशिया (DAFA) के वकील श्री शेरू झूठकरानी ने एक जनहित याचिका दायर कर सभी बॉलीवुड फिल्मों से इस वाक्यांश को हटाने की मांग की थी|

इसपर बॉलीवुड राइटर्स एसोसिएशन ने कहा था के चूंकि माँ बहन की गालियां देना पहले से ही फिल्मों में अधिकृत नहीं हैं इसी कारण “कुत्ते की औलाद” और “कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊंगा” जैसे वाक्यांशों पर निर्भर रहना आवश्यक है| इसपर कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए कहा के “कुत्ते की औलाद” तो नहीं पर “कुकुरपुत्र” शब्द का इस्तेमाल ज़रूर किया जा सकता है| कुकुर समुदाय ने भी “कुकुरपुत्र” को एक सम्मानजनक सम्बोधन मान कर इसकी अनुमति दे दी है, पर शर्त ये के इसे भी स्क्रीन पर काफी शालीन अंदाज़ से कहा जाए| ज्ञात रहे के इसी वाक्यांश पर पिछले वर्ष भी काफी बवाल हो चुका है|

खबर सुनते ही कुकुर समुदाय में खुशी की लहर फैल गई
खबर सुनते ही कुकुर समुदाय में खुशी की लहर फैल गई

मीडिया से बात करते हुए श्री शेरू ने इस मामले के बाबत और जानकारी दी| उन्होंने कहा, “हमारी किसी से दुश्मनी नहीं| कुकुर समुदाय के सभी जीव सभी मानवों से केवल प्रेम की आशा रखते हैं, ये बात जगजाहिर है| परन्तु फिर भी बार बार उनके बच्चों की इस प्रकार बेइज़्ज़ती किया जाना ठीक नहीं, इसी लिए मैंने ये जनहित याचिका दायर की| और अब हमारी जीत हुई| “कुत्ते की औलाद”, “कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊंगा”, “इन कुत्तों के सामने मत नाचना” जैसे डायलॉग का प्रयोग अब वर्जित रहेगा| सेंसर इन शब्दों को म्यूट कर देगा और बोलने वाले अभिनेता का मुंह भी फिल्म पर धुंधला कर दिया जायेगा| हम नहीं चाहेंगे के मानवों की आने वाली पीढ़ी कुकुर समुदाय का उसी प्रकार अपमान करे जिस प्रकार पिछले कुछ वर्षों में होता आया है|

अदालत के इस फैसले का बॉलीवुड फिल्मों की कमाई पर क्या असर पड़ेगा ये तो अभी ज्ञात नहीं है, परन्तु मशहूर अभिनेता एवं निर्देशक पुनीत इस्सर ने इस विषय पर टिपण्णी करते हुए कहा, “देखिये मैं कई वर्षों से फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा हूँ| मुझे नहीं लगता के इस वाक्यांश के हटाए जाने से कोई फर्क पड़ने वाला है| मैंने भी “गर्व” नाम की फिल्म डायरेक्ट की थी| उसमे एक भी जगह कुत्ता शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था| भड़वा, दल्ला, चकला इत्यादि काफी ऐसे acceptable टाइप के अपशब्द हैं जिनका हमने भारी मात्रा में प्रयोग किया था| और सभी दर्शकों ने इस बात की काफी तारीफ की थी के हमने बिना गंदे टाइप के अपशब्द इस्तेमाल किये एक पूरी पुलिस की फिल्म बना डाली|”