Sunday, 17th December, 2017

फड़नवीस के फड़वाचक

05, Feb 2016 By sir1

मुंबई. महीनों पुरानी बात है। ट्विटर पर कुछ भक्तों की चर्चा देख रहा था। बात महाराष्ट्र की हो रही थी। फड़नवीस साब की फड़ बांची जा रही थी। फड़नवीस साब ने मुख्यमंत्री राहत कोष से लाखों रुपयों के खर्च पर सरकारी मुलाजिमों को बैंकाक घुमाने भेजा था। ‘एंटी-नेशनल’ कह रहे थे की हर दिन महाराष्ट्र में तीन किसान मर रहे हैं लेकिन भाजपा सरकार राहत कोष का दुरुपयोग कर रही है। इधर प्रभु की वानर सेना उसका जवाब दे रही थी।

चिंतित फड़नवीस
चिंतित फड़नवीस

देशभक्त कह रहे थे कि मुख्यमंत्री राहत कोष का एक हिस्सा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए भी होता है और अफसर बैंकाक किसी नृत्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गए थे न कि घूमने। उधर बैंकाक में हिन्दू संस्कृति उफान पर थी और इधर देशभक्तों का आत्मविश्वास। चर्चा हो रही थी कि योग और प्राचीन हिन्दू शास्त्रीय नृत्य (जो आजकल सिर्फ बैंकाक में सिखाया जाता है) से शरीर में चुस्ती आती है और आत्मा शुद्ध होती है। चुस्ती की वजह से अफसर (बैंकाक में) अच्छे से परफॉर्म करेंगे। खैर बात आई-गई हो गई। प्रभु की वानर सेना के आगे एंटी-नेशनल रावणों क्या टिक पाते। शायद किसान ही गलत थे। वे ही प्रभु को बदनाम करने के लिए आत्महत्या जैसा कर रहे थे, ठीक उस नक्सली रोहित वेमुला की तरह से जो दलित था ही नहीं और क्योंकि दलित था ही नहीं तो उसके मरने में कुछ भी विशेष न था। लेकिन कल-परसों एक और शुभ समाचार मिला। प्रभु के ‘मेक इन इंडिया’ से प्रेरित होकर देवेन्द्र फड़नवीस ने अफसरों को भारत में ही नृत्य सीखाने के लिए एक पूर्व अदाकारा को नृत्य अकादमी के लिए 40 करोड़ की जमीन 70 हजार में आवंटित कर दी।

शायद स्टार्टअप इंडिया से भी प्रेरित रहे हों। अपनी ड्रीम गर्ल को नृत्य सिखाते देख शायद किसानों का तनाव कुछ कम हो जाए। लेकिन क्या बसंती इन ‘कुत्तों’ के सामने नाच पाएगी। धर्म तो इन कुत्तों का खून पी जाना चाहता है। फिर पूर्व सेनापति भी तो कुत्तों की जिंदगी के प्रति बेपरवाह रहे हैं। ट्विटर पर देशभक्तों के मुद्दे नित-नए थे। कह रहे थे नाना पाटेकर और अक्षय कुमार किसानों की मदद कर रहे हैं जबकि एंटी-नेशनल केन्द्रीय कृषि मंत्री शाहरुख़ खान और महाराष्ट्र के कृषि मंत्री आमिर खान हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। फिर शिवाजी द्वारा अफज़ल खान के वध का वीर रसात्मक वर्णन शुरू हुआ। मुझे डर लगा कि इन काव्यों से जोश में आ किसान हथियार न उठा लें। वैसे ये आशंका नाना पाटेकर भी जता चुके थे। राष्ट्रवादी ज्योतिष कहता है औरंगाबाद का नाम बदलकर शिवाजी नगर रखने से विदर्भ में देवराज इंद्र मेहरबान होंगे और अकाल पड़ना बंद होगा। वैसे मेरे पढ़े शास्त्रों के मुताबिक देवेन्द्र सिर्फ अप्सराओं पर मेहरबान होते हैं।