Monday, 23rd October, 2017

एक ही प्रसंग: विभिन्न कवियों की कलम से

16, Apr 2016 By dap94

प्रसंग है: एक नवयुवती छज्जे पर बैठी है, वह उदास है, उसकी मुख मुद्रा देखकर लग रहा है कि जैसे वह छत से कूदकर आत्महत्या करने वाली है। विभिन्न कवियों से अगर इस पर लिखने को कहा जाता तो वो कैसे लिखते:

मैथिली शरण गुप्त- अट्टालिका पर एक रमिणी अनमनी सी है अहो किस वेदना के भार से संतप्त हो देवी कहो? धीरज धरो संसार में, किसके नही है दुर्दिन फिरे हे राम! रक्षा कीजिए, अबला न भूतल पर गिरे।

काका हाथरसी- गोरी बैठी छत पर, कूदन को तैयार नीचे पक्का फर्श है, भली करे करतार भली करे करतार,न दे दे कोई धक्का ऊपर मोटी नार, नीचे पतरे कक्का कह काका कविराय, अरी मत आगे बढना उधर कूदना मेरे ऊपर मत गिर पडना।

गुलजार- वो बरसों पुरानी ईमारत शायद आज कुछ गुफ्तगू करना चाहती थी कई सदियों से उसकी छत से कोई कूदा नहीं था. और आज उस तंग हालात परेशां स्याह आँखों वाली उस लड़की ने ईमारत के सफ़े जैसे खोल ही दिए आज फिर कुछ बात होगी सुना है ईमारत खुश बहुत है।

हरिवंश राय बच्चन- किस उलझन से क्षुब्ध आज निश्चय यह तुमने कर डाला घर चौखट को छोड़ त्याग चड़ बैढीं तुम चौथा माला अभी समय है, जीवन सुरभित पान करो इस का बाला ऐसे कूद के मरने पर तो नहीं मिलेगी मधुशाला

प्रसून जोशी साहेब- जिंदगी को तोड़ कर मरोड़ कर गुल्लकों को फोड़ कर क्या हुआ जो जा रही हो सोहबतों को छोड़ कर

रहीम- रहिमन कभउँ न फांदिये छत ऊपर दीवार हल छूटे जो जन गिरें फूटै और कपार

तुलसी- छत चढ़ नारी उदासी कोप व्रत धारी कूद ना जा री दुखारी सैन्य समेत अबहिन आवत होइहैं रघुरारी

कबीर- कबीरा देखि दुःख आपने कूदिंह छत से नार तापे संकट ना कटे, खुले नरक का द्वार”

श्याम नारायण पांडे- ओ घमंड मंडिनी, अखंड खंड मंडिनी वीरता विमंडिनी, प्रचंड चंड चंडिनी सिंहनी की ठान से, आन बान शान से मान से, गुमान से, तुम गिरो मकान से तुम डगर डगर गिरो, तुम नगर नगर गिरो तुम गिरो अगर गिरो, शत्रु पर मगर गिरो।

गोपाल दास नीरज- हो न उदास रूपसी, तू मुस्काती जा मौत में भी जिन्दगी के कुछ फूल खिलाती जा जाना तो हर एक को है, एक दिन जहान से जाते जाते मेरा, एक गीत गुनगुनाती जा

राम कुमार वर्मा- हे सुन्दरी तुम मृत्यु की यूँ बॉट मत जोहो। जानता हूँ इस जगत का खो चुकि हो चाव अब तुम और चढ़ के छत पे भरसक खा चुकि हो ताव अब तुम उसके उर के भार को समझो। जीवन के उपहार को तुम ज़ाया ना खोहो, हे सुन्दरी तुम मृत्यु की यूँ बाँट मत जोहो।

Honey Singh कूद जा डार्लिंग क्या रखा है जिंजर चाय बनाने में यो यो की तो सीडी बज री डिस्को में हरयाणे में रोना धोना बंद कर तू कर ले डांस हनी के गाने में रॉक एंड रोल करेंगे कुड़िये फार्म हाउस के तहखाने में !!

Ravish Kumar काली स्क्रीन हो चुकी, तू जीवन काला कर, जात तेरी क्या है, बस यह बताकर मर.. गर तू जो हिन्दू हुई, तो मैं हो जाऊं फर्रर्.! दलित-मुस्लिम तू जो होई, तो मैं होऊं अमर.. रवीश यह बोलन चला, बता तू अपनी ज़ात, NDTV की TRP बढ़ा, फिर भले जिंदगी को दे दे मात।।

Kumar Vishwas- कोई आत्महत्या समझता है, कोई खुदखुशी कहता है। मगर इस फर्श की बेचैनी को बस कर्ता समझता है। अभी तक डूब कर करते थे बस खेल आँखों से, उसी छत से टपक बैठा वो बस कायर समझता है।

Arvind Kejriwal- यह तो साजिश है बड़ी छत पर लड़की है खड़ी अडानी अम्बानी मोदी की भ्रष्ट यह सरकार है रुक जा लड़की दो मिनट,बस धरने की दरकार है even डे पर लड़की सुन ले , odd मत यह काम कर या मोदी जिम्मेवार हे कह कर मोदी को बदनाम कर छत कितनी ऊँची हे ,हम नापेंगे ,सिसोदिया तुम फीता दो चलो आपियों जोर से बोलो “मोदी तुम इस्तीफा दो “

Barkha Dutt- मोदी तेरे राज मे क्या हो गया हाल है किसान तो किसान ,युवती भी हो गयी बेहाल है।

Digvijay Singh- सुंदरी नहीं ये छत पे बैठा कोई और मायाजाल है, सुसाइड उसाइड कुछ नही के बीजेपी की चाल है। क्यों कूद रही हो छोरी इतना अच्छा माल है, ये मोदी नही है, भेड़िया in शेर की खाल है।

What actually girl think उदास छत पर बैठी हूं, राह देख कर उसकी, उसके चक्कर मे नही ली सुबह से चाय की चुस्की, भेजा प्यारा सा message और किये कई call, कंब्बख़्त ने पूंछा ही नही एक बार मेरा हाल, ना आया वह तो गम के मारे फूंट फूंट कर रो जाऊंगी, कूंदे यहां से दुश्मन मेरे मै तो घर जाकर सो जाऊंगी