Thursday, 27th July, 2017

दुष्ट प्रचारक

29, Mar 2017 By Manpreet Singh

चुनाव सर पे आया तो पार्टी ने प्रचारक को बुलाया

कहलवाया, जल्दी आओ कैसे करना है इस बार, कुछ प्लान बताओ

प्रचारक दौड़ा आया साथ में स्मार्ट फ़ोन और लैपटॉप रूपी हथियार भी लाया

बोला हम कोई रिस्क ना उठाएंगे जो लहर चल रही है उसी में नांव चलाएंगे

धर्म,संस्कार,देश भक्ति और विकास का नारा लगा देंगे कह देंगे दूसरी पार्टी के सब वादे झूठे हैं यहाँ वहां से कहानियां जोड़ कुछ गंभीर आरोप चिपका देंगे

Twitter, Facebook, Whatsapp कुछ ना छोड़ेंगे अखबार, न्यूज़ चैनल और घर घर जा कर हम जनता को अपनी और मोड़ेंगे

अति प्रसन्न हो पार्टी अध्यक्ष बोले अति उत्तम, स्टार प्रचारक शुरू हो जाओ और रोज़ दिन में तीन बार प्रोगेस रिपोर्ट भिजवाओ

जो आज्ञा, कह प्रचारक निकल पड़ा कुछ ही दूर गया था की देखा एक पोस्टर ज़मीन पर गिरा

ना जाने किस पार्टी या किस संघ का था फटा पुराना,सिवाय दो शब्दों के,बाकी था मिट गया

सत्यमेव जयते

सोचा प्रचारक ने मन ही मन सत्य तो वही है जो हम बतलाते हैं ये भूख, प्यास, नौकरी, क़र्ज़, बिलों और टैक्स के मारे लोग सत्य – असत्य से दूर हमारे मन के भाषनो अपना जी बहलाते हैं

आओ तुम्हे ले चले नयी दुनिया में बस इतना ही सुन जनता बहक जाती है लाइन लगाती है आज भी मित्रों बड़े प्यार से धोखा खा जाती है

ना जाने क्यों रुक गया वहीँ बुत बनके और बार बार पड़ता रहा वह पोस्टर कड़कती धुप में जलके

सत्यमेव जयते सत्यमेव जयते सत्यमेव जयते

जाने क्या हुआ अचानक, वो गया काँप उड़ा थे रंग चेहरे से, जैसे सूंघ गया सांप

शरीर से एक सिरहन सी दौड़ गयी शायद कोई दुष्ट आत्मा घुस गयी

सम्भला किसी तरह और चल निकला

रुका घर पहुँच कर, Laptop किया On लगा बनाने पोस्टर, बैनर, Facebook Post, Tweet कई घंटे बीत गए, थक गया बज्ज बज्ज करके फ़ोन

सुबह से हो गयी शाम पर आखिर पूरा हुआ काम

दबा लैपटॉप पे ENTER चालु हुआ Printer

Facebook , Twitter, Whatsapp टिंग टिंग करने लगे Like, Share, Retweet से पेज भरने लगे

एक बंडल पोस्टर का बगल में उठाया और प्रचारक जनता से मिलने आया

गली में पहले घर की बेल बजायी भारत की जनता मुंह में पल्लू दबाये दरवाजे पर आयी

प्रचारक ने कहा नमस्ते! वोट ज़रूर दीजिये ये हमारी पार्टी का सन्देश ज़रूर पढ़ लीजिये

मगर रुकिए तो आप कोन? किस पार्टी से आये है?

प्रचारक मुस्कुराया ये सवाल बेमतलब है आज की में कौन किस पार्टी से आया हूँ? ज़रूरी है तो बस की क्या सन्देश लाया हूँ

बस इतना कह प्रचारक आगे बड़ा और अगले घर के दरवाजे सामने हुआ जा खड़ा

हैरान जनता ने हाथ में पकड़ा पोस्टर नज़र से मिलाया शब्दों पर नज़र दौड़ाई तो बहुत गुस्सा आया

जैसे गन्दी गाली समान शायद उसपर कुछ लिखा

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लोकतंत्र के आलसी मालिकों

अपना वोट धर्म, पार्टी, जति, परेशानियों, वादों,इरादों, निशानों, झंडों, भाषणों, आरोपों, डायलॉग, नौटंकी, कोटा, रिजर्वेशन, नौकरी, सफाई, गन्दगी, नोट, कार्ड, नेता, अभिनेता और उम्मीदवार के आधार पर मत डाले| ये कही सुनी बातें है जो चुनाव को ध्यान में रख की जाती है| वोट उसे दे जिसने खुद झाड़ू उठा कर आपकी गली साफ़ की हो और आप को देख शर्म आयी हो| वोट उसे दे जिसने आप सबको मना कर पैसे जमा कर सड़क और स्ट्रीट लाइट ठीक करवाई हो| वोट उसे दे जो बिना रिश्ते के भी थाने और अस्पताल में साथ खड़ा हो| और अगर ऐसा नहीं है कोई उम्मीदवार खड़ा तो आलस छोड़ो| तुम सिर्फ नारे सुनने और बोलने की मशीन नहीं हो| तुम लाल बत्ती वालों से बेहतर कर सकते हो| खुद चुनाव में खड़े हो जाओ| नहीं तो मत कहना निकम्मी सरकार निकली| वादे झूठे थे|लूट लिया| बारबाद हुए|

आदर सहित प्रणाम दुष्ट प्रचारक

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बस इतना पढ जनता के मुख पर हंसी खिल आयी “पागल कहीं का” कहकर मन में भी मुस्कुरायी