Monday, 23rd October, 2017

दंगा न हो पाने के चलते निराशा

31, Aug 2017 By Abhinay Jha

रोहतक जेल में डेरा सच्चा सौदा के मुखिया राम रहीम को सीबीआई द्वारा बीस साल की क़ैद की सजा सुनाये जाने के बाद किसी बड़ी हिंसा के न भड़कने से मीडिया चैनलों और व्हाट्सएप, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ाने वालों में बड़ी मायूसी का आलम है. उन्हें इस बात का बहुत मलाल है कि समय काटने का हाथ आया एक बड़ा मौका चूक गया. सजा सुनाए जाने से पहले वाले वीकेंड में लोगों ने बड़ी तैयारियाँ कर रखी थीं कि कैसे दोस्तों को और साथ काम करनेवालों को क्या-क्या कहानियाँ सुनाएँगे. कैसे ये कह सकेंगे कि वे तो जलती हुई बस में से उतरकर जैसे-तैसे सिर्फ यह खबर सुनाने के लिए ही निकल भागे और कैसे वे फ़ॉर्वर्डेड मैसेज को अपना बना कर भेज पाए.

रायट भी रॉकिंग तरीके से करेंगे
रायट भी रॉकिंग तरीके से करेंगे

28 साल के मयंक नाराज़ हैं कि उन्होंने सिर्फ इन जलती हुई बसों के वीडियो संभाल के रखने के लिए अपने मोबाइल में स्पेस बनाया था पर कुछ ‘न हो पाने’ के चलते वे निराश हो गए हैं. वे कह रहे हैं कि कहाँ तो आज वे मारा-धाड़ और एक्शन से भरपूर मैसेज फॉरवर्ड करते और हर मोबाइल में त्यौहार सा माहौल रहता और कहाँ तो उन्हें आज के दिन भी एनिमेटेड फूल वाले गुड मॉर्निंग के मैसेज भेजने पड़ रहे हैं.

टीवी चैनलों में भी पर्याप्त हताशा देखी जा सकती है. रिपोर्टरों के बीच जैसे दो दिन पहले से तय की हुई “मैं ज्यादा ज्ञानी” और “मैं बड़ा सेटर” की प्रतियोगिता बिना नोटिस दिए ही रद्द कर दी गई हो. उन्हें अब दबे-छुपे यही कह के काम चलाना पड़ रहा है कि “सब कुछ दिखा-बता नहीं सकते, पर हुआ तो बहुत कुछ है”.  उन्हें अपनी क्रिएटिविटी से अपनी जानकारी की कमी को दबाना पड़ रहा है. एंकरों-प्रोड्यूसरों को भी उन्हीं पुरानी फुटेज से काम चलाना पड़ रहा है. विज्ञापनों के रेट गिर गए हैं सो अलग.

ऑफिस जाने वालों के बीच भी अलग किस्म के अवसाद देखे जाने की खबरें हैं. अलग-लग चैनलों से बार-बार बताये जाने और इक्के-दुक्के मैसेज़ ग्रुप में फॉरवर्ड के बाद भी न तो कोई ट्रैफिक डिस्टर्ब हो पाया और न ही कोई भी ऑफिस बंद हो पाए. थक-हार कर अगली सुबह भारी मन से उन्हीं चैनलों ने बताया कि हालात सामान्य बने हुए हैं.

पर इस तमाम उहापोह की स्थिति में सबसे अधिक हैरत में वहाट्सएप इस्तेमाल करनेवाले वे वरिष्ठ ताया-ताई, फूफा-बुआ लोग दिखे जो हाल ही में हुई दूसरे छिटपुट दंगों और आगजनी के वीडियो को अभी का ताज़ा वहाट्सएप वीडियो समझ रहे थे. उन सबको बड़ी मुश्किल से समझाया जा सका कि सब इंतज़ार तो कर रहे थे, उम्मीद भी लगा रखा था पर इस बार दरअसल कुछ हुआ ही नहीं.