Friday, 21st July, 2017

पटाखा फैक्ट्री के दस वर्षीय मुन्नू ने केवल बाईस घंटे में पांच-सौ सुतली-बम बनाकर तोड़ा विश्व कीर्तिमान

11, Nov 2015 By Pagla Ghoda

गोदावरी डिस्ट्रिक्ट: पटाखा फैक्ट्री के बाल कारीगर दस वर्षीय मुन्नू ने लगातार बाईस घंटे तक काम करते हुए पांच सौ सुतली बम बनाकर एक नया विश्व कीर्तिमान स्थापित क्या है| इस कीर्तिमान को इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि ये काम मुन्नू ने लगभग अँधेरे में केवल एक मोमबती की रौशनी में बैठकर किया| दुसरे नंबर पर इसी फैक्ट्री का एक और बच्चा बबलू रहा जो की बाईस घंटे में केवल चार सौ पंचानवे सुतली बम ही बना पाया और रिकॉर्ड से वंचित रह गया|

मुन्नू की तरह एक और लड़का
मुन्नू की तरह एक और लड़का

मुन्नू के माता पिता का तो कोई अता-पता नहीं, पर उनके मुंहबोले चाचा होरी जिनका पालन पोषण मुन्नू करता है उन्होंने बताया – “मुन्नू को तो पांच साल की उम्र से ही काम काज करने का शौक है, मैंने कितना कहा के स्कूल जा बेटा, पढाई कर, ज़िन्दगी में कुछ बन, लेकिन जबसे ये पांच साल का है तभी से कहता है के चाचा आपकी दारु का … मतलब के आपकी दवा दारु का इंतज़ाम कौन करेगा? एक बार तो मैंने बारह दिन तक भूखा रखकर इसकी पिटाई की तब जाकर फैक्ट्री जाने को … मेरा मतलब के स्कूल जाने के लिए तैयार हुआ हरामी|”

एक पतली से बाटली से कुछ घूंठ दवा पीकर होरी चाचा ने आगे बताया – “मुन्नू और इसके जैसे कई नौजवान बच्चे इन फैक्टरियों में काम करके अपने परिवारों का पालन पोषण करते हैं| अपनी जान पर खेलकर और लोगों के लिए जहरीले ज्वलंतशील पटाखे बनाना, औरों की ख़ुशी के लिए अपनी जान दांव पर लगा देना, ये सब आसान नहीं है साहब| मुझे इन जवान बच्चों पर गर्व है|”

फैक्ट्री के मालिक सेठ ज्वालाप्रसाद आग्नेय जो की आजकल परिवार-सहित US के सिनसिनाटी शहर में सेटल्ड हैं उन्होंने भी सभी फैक्ट्री वर्कर्स को इस रिकॉर्ड के टूटने पर बधाई दी है| एक व्हाट्सऐप वीडियो भेज कर उन्होंने कहा – “पिछले दस बारह साल से हमारी फैक्ट्री के बच्चो को इतनी बढ़िया ट्रेनिंग दी जाती है के वह मिनटों में कई खतरनाक पटाखे, राकेट, गोले बम, सुतली बम इत्यादि तयार कर देते हैं| मेरे अपने बच्चे भी लगभग इसी उम्र के हैं इसलिए इन फैक्ट्री के बच्चो की उपलब्धियां देखकर मुझे बड़ी ख़ुशी होती है| मेरे बच्चे जैसे ही टेनिस कोचिंग से वापिस आये मैंने उन्हें इस बारे मैं बताया तो वे काफी खुश हुए|”

जवालाप्रसाद जी ने भावुक होते हुए आगे कहा – “हमारी फैक्टरियों में तो कहा जाता है के अमीरों के बच्चे दस मिनट में इतने अनार जला नहीं सकते जितने हमारी फैक्ट्री के बच्चे बना सकते हैं| इस देश का भविष्य हैं ये बच्चे|”