Thursday, 26th April, 2018

बोलो- "बाबा की जय", "बाबा की मैय्या की जय"

20, May 2016 By Guest Patrakar

सड़क पर कार हिचकोले खाती चली जा रही थी। लाइट फूटी पड़ी थी, टायर में हवा कम थी, एक तो शायद पंचर ही था। जगह जगह खरोंचें पड़ी थीं, पेंट उखड़ा पड़ा था, दरवाजे भी निकले पड़े थे। अंदर बैठे आदमियों मे से कभी भी कोई बाहर गिर सकता था। पर एक आदमी था, जो मजबूती से स्टेयरिंग पकड़े बैठा था। पीछे पसीने से तरबतर लोग धक्का लगाए चले जा रहे थे। साथ ही लाल रंग की स्कूटी पर एक घुंघराले बाल वाला आदमी रास्ता बताता चल रहा था।

Rahul Gandhi
गाड़ी ठुकने के बाद सड़क साफ़ करता कार ड्राइवर

जैसे ही अगला मोड़ आया, ड्राइवर ने आस्तीनें ऊपर चढ़ा लीं। वो लंबी लंबी सांसें लेने लगा। तभी गाड़ी में एक ज़ोर का जयकारा गूंज उठा- “बोलो बाबा की जय!” “बाबा की माता की जय!” जयकारा सुनकर ड्राइवर फूल कर कुप्पा हो गया लेकिन उसका पूरा ध्यान सड़क पर ही था। तभी ना जाने कहां से एक भगवा रंग की चमचमाती कार बीच में आ गई लेकिन ड्राइवर पूरी तरह मुस्तैद था। टूटी फूटी ही सही पर कार की ज़िम्मेदारी उसी पर थी, जिसमें उसकी मां समेत 6 राज्यों से आए प्रमुख रिश्तेदार भी सवार थे। ड्राइवर ज़ोर से चिल्लाया, उसने ब्रेक मारने की कोशिश भी की पर शायद पेट्रोल के साथ साथ ब्रेक ऑयल भी सूख गया था। भगवा रंग की कार साइड मारते हुए आगे निकल गई। ड्राइवर के नथुने फूलने लगे क्योंकि उसे सूट-बूट वालों से सख्त नफ़रत थी। उसने तेज़ी से गाड़ी लेफ़्ट काटी। पर वो कार संभाल ना सका। गाड़ी इतना लेफ़्ट कट गई कि लाल स्कूटी पर साथ चलने वाले आदमी के ऊपर जा चढ़ी। गाड़ी एक बार फिर ठुक गई।

अब ड्राइवर बुरी तरह घबरा गया। माता ने उस के सर पर अपना पल्लू डाल दिया। पीछे धक्का लगाने वाले आगे आ गए। माजरा समझते उन्हें तनिक भी देर ना लेगी। कोई कुछ कर पाता इससे पहले पुलिस आ गई और मीडिया भी। आते ही हवलदार ने डपट कर पूछा- “गाड़ी कौन चला रहा था?” सबने एक साथ स्टेयरिंग थामे बैठे ड्राइवर की तरफ देखा। पर उसकी मासूमियत देख कर सभी का दिल पिघल गया। अचानक उनमें से एक बोला- “यह हम सब की ज़िम्मेदारी है। हम लोगों ने ही तेज़ धक्का लगाया। इसमें इनकी कोई गलती नही। दरअसल ये बेचारा तो अभी थाईलैंड से छुट्टिया मना कर आया है। इसे इंडिया के बारे में कुछ नही पता। इसे तो हमने बहलाने के लिए स्टेयरिंग पर बैठा दिया था।” “मैं जिम्मेदार” “मैं जिम्मेदार” का शोर बढ़ता ही चला जा रहा था। हवलदार कुछ समझ पाता, इससे पहले ही लाल स्कूटी वाले को होश आ गया। हवलदार धमकी देने वाले अंदाज़ में बोला- “जब तक मैं उस लाल स्कूटी वाले का बयान लूं, गाड़ी से कोई नही उतरेगा और ना ही धक्का लगाने वाले कहीं जाएंगे।”

गाड़ी की हालत का अंदाज़ा लगाते हुए पत्रकार ने गाड़ी में सवार एक सज्जन से पूछा- “भाईसाब, जब गाड़ी की हालत इतनी ख़राब है तो नयी क्यों नही ले लेते?” शून्य में ताकते हुए वो सज्जन बोले- “क्या बताएं बंधु, पहले हमारे पास बड़ी वोल्वो बस हुआ करती थी। शानदार सीटें, बढ़िया इंटीरियर, बेहतरीन एयरकंडीशन। और तब रिश्तेदार भी काफी थे। घर में प्रमुख लोगों की कमी नही थी। लेकिन भगवान की ऐसी मार पड़ी कि एक्सीडेंट पर एक्सीडेंट होते गए। सारे ख़ास रिश्तेदार एक एक कर टपकते गये। अब बस हम 6 ही बचे हैं। और हमारे लिए तो ये कार ही काफी है।”

अपनी रौ में वो बोल तो गये पर जैसे ही उनकी नज़रें ड्राइवर की मां से मिलीं, उनकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। पत्रकार गाड़ी का जायज़ा लेते हुए बोला- “लगता है पिछले मोड़ पर भी गाड़ी ठुकी थी!” वही सज्जन दोबारा बोल उठे- “तुम्हें क्या! हमारी गाड़ी है तुमसे मतलब?” पत्रकार बोला- “भई मैं तो बस यही पूछना चाहता था कि जब गाड़ी हर मोड़ पर ठुक रही है, रिश्तेदार पर रिश्तेदार अल्लाह को प्यारे होते जा रहे हैं तो ड्राइवर बदल क्यों नही देते? क्या आप में से किसी को गाड़ी चलानी नही आती?” “आती क्यों नही! पर हमें अपने ड्राइवर पर पूरा भरोसा है। ये हमें सुरक्षित पहुंचा देगा। क्यों भाईयो?” गाड़ी में एक बार फिर जयघोष हुआ- “बोलो बाबा की जय!” “बोलो बाबा की मैय्या की जय!”

जयकारे का पत्रकार पर कुछ खास असर नही पड़ा, वो बोला- “”क्यों जान से खेलते हो! जब ये गाड़ी हर मोड़ पर ठुक रही है तो जल्दी ही वो दिन भी आ जाएगा, जब आप सभी पैसेंजर भी भगवान के दरवाज़े पे दस्तक दे रहे होंगे। तब इस ड्राइवर और इसकी मां के लिए तो मोटरसाइकिल ही काफ़ी होगी। अभी भी वक़्त है, ड्राइवर को हटा दो।” तब गाड़ी में सवार एक दूसरे सज्जन बड़े ही दार्शनिक अंदाज में बोले- “भईया ये गाड़ी इनके पुरखों की है। उन्होंने ही इटली से इसको खरीदा था। इसलिए चाहे हमारी जान भी चली जाए पर गाड़ी तो ये ही चलाएगा- ‘या तो यूँ ही चाल्लेगी!” तब तक हवलदार लाल स्कूटी वाले का बयान ले कर वापिस आ गया। पत्रकार ने पूछा- “क्या बताया उसने?” हवलदार मुंह बिचका कर बोला- “पगलैट है साला! वो हिट सीरियल है ना ‘भाबी जी घर पे है’, उसमें वो किरदार है ना सक्सेना, जो हर बार पिट कर बोलता है- आई लाइक इट! साला वैसे ही बोले चले जा रहा है। दिमाग का दही कर दिया।” अब तक कूढ़मगज़ की तरह बैठे ड्राइवर को जैसे होश आ गया। वो लपक कर हवलदार के पास जा पहुंचा और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता या उसे रोक पाता वो हवलदार से मुख़ातिब होते हुए बोला- “इस एक्सीडेंट की ज़िम्मेदारी मैं विनम्रता पूर्वक स्वीकार करता हूं।”

हवा में एकबार फिर जयघोष गूंजने लगा- “बोलो बाबा की जय”, “बाबा की मैय्या की जय!”



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