Wednesday, 20th September, 2017

बिहार की ट्रेन में सफलता पुर्वक तत्काल टिकट बुक कर युवक को हुआ एक बड़ी उप्लब्धि का एहसास

31, Jan 2017 By ANKIT SHARMA

पुणे| पुणे स्टेशन पर पुणे पटना एक्सप्रेस प्लेटफार्म पर लग रही थी| ट्रेन देखते ही मै एक हाथ में रुमाल और दूसरे में सामान लिए सामान्य श्रेणी की डब्बे की ओर भागने लगा| भागते भागते मेरा मन इंदौर स्टेशन पर आ गया जहाँ भोपाल जाने वाली पैसेंजर ट्रेन प्लॅटफॉर्म पर लग रही थी| ट्रेन की रफ़्तार कुछ धीमी हुई और मैंने सामान्य श्रेणी के डब्बे की खिड़की के पास वाली सीट पर बहार से अपना रुमाल फेंक दिया और दौड़ते हुए दरवाजे से डब्बे में अपना सामान लेकर कूद पड़ा अचानक से याद आया मुझे मेरे पास तृतीय श्रेणी वातानुकूलन की टीकट है| अपनी रफ़्तार कम की और पास की एक बेंच पर जा बैठा और सोचने लगा क्या दिन थे वो कॉलेज के भी| ट्रेन भरी होने पर भी किसी तरह उस मे घुस जाना और बाथरूम के पास नाक पर रुमाल लिए एक पैर पर खड़े होकर घंटो घंटो यात्रा करना क्या विशवास था खुद की कौशलता (Skills) पर जब मंजिल तक पहुचने के लिए आरक्षण की जरुरत महसूस नहीं होती थी| कितना महफूज लगता था उस समय यात्रा करना|

जब भी ट्रैन में आरक्षण लेता हूँ, पहले ही आरक्षण तालिका (Reservation chart) में अपने आसपास की बर्थ पर बैठे सहयात्रियो की उम्र और जेंडर जरूर देख लेता हूँ| उस हिसाब से मुझे एक ऊपर से अंदाज़ा हो जाता है के आगे का सफर कैसा होने वाला है| असल जिंदगी में भी एक अच्छे सफर के लिए एक अच्छे हमसफ़र का होना जरुरी है| दुर्भाग्यपूर्ण उस दिन मुझे सब सहयात्री अपनी उम्र से कही अधिक बड़े मिले| ट्रेन निकलते ही सामने वाली आंटी ने पूड़ी और आलू की सुखी सब्जी से भरे डब्बे निकाल अपने पति और ससुर को कागज़ की प्लेट पर परोस दिया| क्या महक थी उस खाने की कसम से|

पहले मैं सोचता था के लोग शादी क्यों करते और उस दिन मुझे यकीन हुआ के लोग सफर के दौरान अच्छी पूड़ी सब्जी खाने के लिए शादी करते| खाने के बाद सामने बैठे दो दम्पति आपस में बात करने लगे अपनी,अपने बच्चो की के उनके बच्चे पुणे, बैंगलोर, हैदराबाद में आईटी कंपनियों में काम करते है और आजकल कैसे लन्दन, सिंगापुर, अमेरिका जैसी जगहों पर आराम से रहते है| यह बताकर उन्हें एक सम्पूर्णता (Fulfilment) का एहसास हुआ| इन बातों से विपरीत सामान्य श्रेणी में लोग धोनी, नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश की राजनीती इत्यादि विषयो पर घंटो घंटो तक बात करते है| भारतीय रेल के जनरल डब्बे में सीट पाना और ठण्ड, गर्मी के मौसम में अखंड भारत के चरण से ह्रदय और ह्रदय से धड़ की तरफ हज़ारो किलोमीटर की यात्रा करना ही जीवन की एक बड़ी उपलब्धि होती है|

मेरे दिमाग में प्रशन आया मैने क्या उखाड़ा था और मुझे खुद से ही जवाब मिल गया- क्या वो बिहार की गाड़ी में तत्काल ले पाना कोई उप्लब्धि से कम हैं और कुछ समय बाद नींद लग गई।