Friday, 28th July, 2017

भारत में आयोजित हो ओलंपिक्स: श्री सुरेश कलमाड़ी ने सरकार से की अपील

24, Apr 2017 By Dharmendra Kumar

भारतीय ओलिंपिक संघ के अध्यक्ष रहे श्री सुरेश कलमाड़ी का नाम भारत में ‘खेलों के आयोजन’ के सम्बन्ध में बड़ी इज्जत से लिया जाता है. दिल्ली में राष्ट्र मंडल खेलों को रोमांचकारी बनाने में उन्होंने अहम् भूमिका निभाई थी. आज भी उनका नाम जाने बिना सामान्य ज्ञान की कोई भी परीक्षा पास करना संभव नहीं. हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, महापुरुष वे होते हैं जो नकारात्मक एवं सकारात्मक प्रतिक्रियाओं के बीच सामंजस्य बिठा कर रखे.

सुरेश कलमाडी अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए
सुरेश कलमाडी अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए

तमाम छीटां कसीं के बावजूद श्री कलमाड़ी अपने पद पर तब तक डटे रहे थे जबतक उनपर जबरदस्ती नहीं की गयी। यहाँ तक की पिछले दिनों उन्हें फिर से भारतीय ओलिंपिक संघ का मुखिया चुन लिया गया था और पुणे-दिल्ली राजधानी में उनका टिकट भी कनफर्म्ड था लेकिन वर्तमान खेलमंत्री श्री विजय गोयल जी की अदूरदर्शिता के कारण उन्हें आनन-फानन अपना दिल्ली का ट्रिप कैंसिल करना पड़ा.

ज़्यादा काम न होना और समय ही समय होना भी कभी- कभी खलता है. इस घटनाक्रम के पश्चात श्री सुरेश कलमाड़ी जी ने अपने प्रांगण में ही एक छोटी सी प्रेस विज्ञप्ति की और सरकार को घेरते हुए कहा, ‘खेलों के सम्बन्ध में वर्तमान सरकार पूरी तरह विफल रही है. खेलों का विकास ही खिलाड़िओं की प्रतिभा को निखार सकता है, सबको एक मौके की तलाश होती है और प्रतिभावान खिलाड़िओं को मौके मिलते रहे इसपर सरकार को ख़ास ध्यान देना होगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘आपलोग ही बताइये राष्ट्र मंडल खेलों के सफल आयोजन के बाद भारत में कौन सा विश्वस्तरीय खेलों का आयोजन हुआ है. जैसे मुझे मौका मिला, वैसे ही श्री विजय गोयल जी को भी मौका मिले यह मेरा आग्रह है, उन्होंने भी बहुत संघर्ष किया है लाइफ में’.

यह पूछे जाने पर की आयोजन तो तमाम हुए हैं चाहे वह टेनिस हो या रेसिंग, बैडमिंटन हो या क्रिकेट हर क्षेत्र में भारतीय युवा प्रतियोगी हो रहे है. इस सवालों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, ‘क्रिकेट का तो आप नाम ही न लें, खेलों का आयोजन और कैटरिंग के आयोजन में फरक होता है. सबकुछ कॉर्पोरेट जैसा हो तो कैसे चलेगा। मैं सरकार से मांग करता हूँ के वह अगला ओलंपिक्स भारत में हो, ऐसी व्यवस्था करे और वर्तमान खेल मंत्री को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दे’.