Monday, 25th September, 2017

बाण पर FACT लिखकर चलाने पर ही वीर राजकुमार कर पाया आदर्श लिबरल दैत्य का संहार

27, May 2015 By Pagla Ghoda

कुसुमपुर: पौराणिक समय में कुसमपुर नाम के राज्य में महाराज स्वरूपसेन का राज्य था। अपनी पत्नी सुशीलावती और अपने पुत्र वीरसेन के साथ महाराज स्वरूपसेन कुशलता पूर्वक राज्य कर रहे थे। उनके राज्य में चारों और खुशहाली थी, उनकी प्रजा भी उनके समान समर्थ एवं कर्मठ थी। एक दिन अचानक उस राज्य में एक आदर्श-लिबरल दैत्य आ पहुंचा और राज्य के ठीक बाहर एक काली गुफा में रहने लगा।

आदर्श-लिबरल दैत्य भिन्न भिन्न प्रकार के रूप धरकर लोगों को सताता था। पहले पहल वह एक पत्रकार के रूप में इधर की खबरें उधर करने लगा। उससे राज्य में कुछ लड़ाई झगडे अवश्य हए परन्तु महाराज स्वरूपसेन ने सब लोगों में सुलह करा दी।

इससे चिढ़कर पत्रकार बने आदर्श लिबरल दैत्य ने अब झूठी खबरें छापनी शुरू कर दीं। उसने छापा के कल्लू सुनार जंगु लुहार से नौका-रेस में इसलिए हार गया क्योंकि सुनार समुदाय के लोगों के साथ पुराने समय से ज़्यादती होती आई है। जबकि सबने देखा के कल्लू अपने मोटापे के कारण नौका नहीं चला पाया था। इतना ही नहीं, कहीं और हुई रेस में लुहारों की होती हार को आदर्श लिबरल दैत्य ने कहीं नहीं छापा। सिर्फ चुनिंदा खबरें छापकर, सीधे सादे कुशलता एवं योग्यता के मुद्दों को आदर्श लिबरल दैत्य ने सांप्रदायिक रंग देने शुरू कर दिए।

आदर्श लिबरल दैत्य को लाल रंग बहुत पसंद था: सूत्र
आदर्श लिबरल दैत्य को लाल रंग बहुत पसंद था: सूत्र

इसके बाद आदर्श लिबरल दैत्य ने एक समाज सेवी का रूप धर लिया और नाना प्रकार के आंदोलन चला कर छोड़ दिए। दूसरे राज्य के राजाओं से पैसा लेकर उसने सारे सरकारी कामों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। प्रजा में से कुछ निठल्ले लोगों को साथ लेकर उसने जगह जगह प्रदर्शन भी शुरू कर दिए। इन सब कृत्यों से पूरे कुसुमपुर में अराजकता फैलने लगी।

प्रजा की इस दुर्दशा से महाराज बहुत दुखी हुए। उन्होंने अपने पुत्र वीरसेन को बुला कर राज्य की बिगड़ती हालत समझायी। प्रजा की रक्षा करने हेतु वीरसेन ने तब आदर्श लिबरल दैत्य का वध करने का प्रण लिया और अपने अस्त्र शास्त्रों से सुसज्जित होकर निकल पड़ा।

उसने आदर्श लिबरल दैत्य की गुफा के पास जाकर उसे ललकारा और उससे युद्ध करने लगा। उसने तर्क एवं क्रोध सरीखे कई तीव्र बाण आदर्श लिबरल दैत्य पर छोड़े परन्तु ढीठ आदर्श लिबरल दैत्य पर कोई असर नहीं हुआ। आदर्श लिबरल दैत्य तब भी मूर्खों की तरह ज़ोर ज़ोर से हँसता रहा और वीरसेन को निराश युद्धक्षेत्र से लौटना पड़ा।

तब वीरसेन अपने गुरुदेव ऋषि व्यंग्याचार्य के आश्रम में पहुंचा और उनसे इस दैत्य पर विजय पाने का उपाय पुछा। उसकी कथा सुनकर व्यंग्याचार्य ने उससे कहा, “प्रिय राजकुमार, इस आदर्श लिबरल दैत्य को मारने का केवल एक ही उपाय है। तुम अपने बाणों पर FACT शब्द लिख डालो और फिर उसपर चलाओ। उसके उपरान्त आदर्श लिबरल दैत्य का संहार अवश्यम्भावी है। मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है।” – यह कहकर ऋषि महाराज अपनी कालनिद्रा में लीन हो गये।

गुरुदेव का आशीर्वाद लेकर वीरसेन ने वैसा ही किया। उसने अपने सभी बाणों पर FACT शब्द लिख दिया और फिर जाकर आदर्श लिबरल दैत्य को ललकारा। पहले कुछ FACT बाण लगने पर आदर्श लिबरल दैत्य उत्तेजित होकर वीरसेन से अपशब्दों का प्रयोग करने लगा। इन अपशब्दों से न घबरा कर वीरसेन FACT रुपी बाण चलाता रहा।

आखिरकार बहुत सारे FACTS मिल जाने पर दैत्य को अपनी आदर्श लिबरल मानसिकता का त्याग करना पड़ा। उस मानसिकता का त्याग करते ही उसके शरीर में एक भीषण विस्फोट हुआ और वह मृत्यु को प्राप्त हुआ। युद्धभूमि से विजयी लौटे वीरसेन का प्रजा ने भव्य स्वागत किया और पूरे कुसुमपुर में फिर से खुशहाली और समृद्धि फैल गयी।