Friday, 19th January, 2018

दिल्ली घूमने आये अमेरिकी टूरिस्ट को लगा कि ‘जाट’ और ‘गुज्जर’ हैं कारों की कंपनी के नाम

14, Nov 2014 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. शहर के धौला कुआं इलाक़े में हुए सड़क हादसे में आज एक अमेरिकी टूरिस्ट बुरी तरह घायल हो गया। पीटर मैनुअल नाम के इस टूरिस्ट ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई कि “सड़क पार करते समय मुझे ‘जिद्दी जाट’ कंपनी की तेज़ रफ़्तार एसयूवी ने टक्कर मार दी।”

ड्यूटी पर तैनात हवलदार राजबीर ने ‘दुर्घटना से देर भली’ वाले नियम का पालन करते हुए रिपोर्ट लिखने में पूरी सुस्ती दिखायी और पीटर को बताया कि “इंडिया में इस नाम की कोई कार कंपनी नहीं है।”

गुज्जर कार
गुज्जर कार

इस जानकारी से हैरान पीटर ने कहा कि, “मैंने तो दिल्ली में हर जगह ऐसी गाड़ियां देखी हैं, जिनके आगे-पीछे ‘जाट’ या ‘गुज्जर’ कंपनी का नाम लिखा होता है। इन कंपनियों की बसें तो सारी दिल्ली में चलती हैं!”

इस पर हवलदार राजबीर ने हंसते हुए पीटर को बताया कि, “पीटर भाईसाब, ये तो म्हारी जातियों के नाम हैं। इन नामों की वजह से तो दिल्ली की सड़कों पर प्यार और भाईचारा बना हुआ है।” इसके बाद राजबीर ने पीटर को एफ़आईआर की कॉपी के बजाय सड़क पर सावधान रहने की सलाह देकर विदा कर दिया। पीटर लंगड़ाते हुए थाने से निकला और डरते-डरते किसी तरह एक घंटे में सड़क पार करके एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गया।

उधर, सुप्रीम कोर्ट ने इस ख़बर का स्वतःसंज्ञान लेकर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगा दी। कोर्ट ने पूछा कि, “दिल्ली-एनसीआर में अभी भी 5% जाट-गुज्जर ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी गाड़ियों पर जाति का स्टिकर नहीं लगा रखा है, तो सरकार ऐसे लोगों को आरक्षण का लाभ क्यों दे रही है?”

अतिरिक्त महाधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि, “एक जनवरी से दिल्ली-एनसीआर में उन सभी गाड़ियों का चालान किया जायेगा, जिन पर जाति का नाम नहीं लिखा होगा। इसके लिए जल्दी ही मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन किया जायेगा।”

श्री रोहतगी ने कोर्ट को यह भी बताया कि, “फिलहाल सरकार उन सभी ट्रकों का चालान करने में व्यस्त है, जिन पर ‘हम दो, हमारे दो’ और ‘दुल्हन ही दहेज है’ नहीं लिखा हुआ है।”