Monday, 18th December, 2017

बड़ा खुलासा- आडवानी जी छुपकर बना रहे हैं टाईम मशीन

29, Jul 2017 By Vish

वैसे तो कहा जाता है कि इन्तज़ार का फ़ल मीठा होता है। और अगर हम इतिहास के पन्ने पलट कर पलट के देखें तो हमारे पास ऐसे अनेकों बेमिसाल उदाहरण भी हैं जहाँ इन्तज़ार करना रंग लाया है जैसे सचिन तेन्दुलकर का 22 सालों बाद वर्ल्ड कप जीतना, करण अर्जुण का उनकी माँ के पास लौट कर आना इत्यादि। पर हमारे आडवानी जी के इन्तज़ार की अब इन्तेहां हो चुकी है। लगता है अब उन्हें भी ये एहसास हो गया है कि अगर वो सिर्फ़ बैठे बैठे इन्तज़ार ही करते रहे तो एक दिन आयेगा जब वो खुद निकल लेंगे पर वो सूरज नहीं निकलेगा जो उनकी कामयाबी की किरण लेकर आये।

वो कहावत है ना ‘जिन्दगी जिन्ने के दो ही तरिक्के होते हैं, इक्क- जो हो रहा है होने दो बरदाश्त करते जाओ, या फ़ेर, जिम्मेदारी उठाओ उसे बदलने की’। तो बस फ़िर, आडवानी जी ने भी इसी से प्रेरित होकर चीज़ो को अपने हाथ में लेने की ठान ली है और निकल पड़े हैं अपना एवं भाजपा का इतिहास बदलने की राह पर।

सब से पहले टाइम-मशीन में घूस के आडवाणी जी ने क्या खोजा?
सब से पहले टाइम-मशीन में घूस के आडवाणी जी ने क्या खोजा?

पर ठहर जाइये! आगे कुछ भी बताने से पूर्व हम आपको सावधान करना चाहेंगे कि इस आर्टिकल को पढ़ने के साथ साथ अगर आप कुछ और भी कर रहे हैं तो बाकी सब काम छोड़ दें, अगर आप खड़े हैं तो बैठ जाएं और अपनी कुर्सी की पेटी बांध लें। क्युंकि हमारी बात सुनने के बाद हो सकता है आप अपना संतुलन बनाये ना रख पायें।

हाँ तो कुछ दिनों पहले फ़ेकिंग न्यूज़ की एक टीम आडवानी जी के घर गयी थी उनका इन्टरव्यू लेने। और ओ भाईसाहब! वहां पहुँच कर हम क्या देखते हैं कि आडवानी जी ने तो अपने घर के बेसमेन्ट में एक गुप्त लैब बनाया हुआ है जहां वो आजकल चुपचाप बिना किसी को भनक लगे एक टाईम मशीन का निर्माण कर रहे हैं। थोड़ी देर उनपर नज़र रखने के बाद सारा माजरा हमारी समझ में आ गया।

ना तो चचा को आजकल कोई कहीं बुलाता है ना ही उनका कहीं आना जाना होता है ऐसे में वो सारा सारा दिन खुद को लैब में बंद कर एक्सपेरीमेंट करते रहते हैं। दरअसल वो 90 के दशक में वापस जाकर खुद को एक और चाँस देना चाहते हैं। उन्होंने एक लम्बे बालों वाला विग मंगा रखा है और रस्म के तौर पर बिना विग पहने लैब में प्रवेश नहीं करते हैं। फ़िर जब उनका कोई एक्सपेरिमेंट फ़ेल होता है तो उसी विग के बाल नोंचने लग जाते हैं। वैसे तो किसी से कुछ बोलते नहीं हैं पर खुद से ही अँग्रेज़ी में बड़बड़ाते रहते हैं कि ‘I will put things right’।

फ़िर हमने उनके घर काम करने वाले लोगों से बात की। उनके एक घरेलु सहायक, सतीश पाण्डे, ने हमें बताया, “सठिया गये हैं और कुछ नहीं। एक ही जगह loop में आगे पीछे आगे पीछे घूमते रहते हैं और जाने क्या बुदबुदाते रहते हैं। खुद को तहखाने में बंद कर लेते हैं, बड़ी डरावनी डरावनी आवाज़े आती हैं बाप रात भर फ़टी रहती है। पीछले हफ़्ते की बात है घण्टे भर से चुपचाप खोये हुए से बैठे एक ही जगह तांके जा रहे थे कि अचानक हमारी तरफ़ देख मुस्कुराकर हमसे पूछते हैं ‘मेरी रथ यात्रा पर चलोगे, मित्र’ और इतना कहकर फ़िर खो गये। साला सोचते सोचते दिमाग खराब हो गया कि रथ यात्रा तो बुढ़ऊ 25-30 साल पहले कर के आ गये थे अब इस उमर में जहां बिना मदद बाथरूम तक नहीं जा पाते वहां कौन सी यात्रा निकालने वाले हैं। कल सफ़ाई करते वक्त इनका पद्म विभूशण मेरे हाथ से छूट कर नीचे गिर गया। चचा ने देख लिया और गम्भीर मुद्रा में मेरे पास आये। हम डर गये पर फ़िर हमारे कन्धे पर हाथ रखकर बड़ी विनम्रता से कहा ‘लाल, तू घबरा मत। मैं सब ठीक कर दुंगा’।”