Monday, 23rd October, 2017

लकी की शादी का आंखों देखा हाल!

09, Feb 2013 By Anil Sharma

बड़ी मशक्कतों के बाद लकी की शादी तय हुई थी और आज वो दिन था जब लकी के इंतजार की घड़ियां खत्म होने जा रही थी। लकी की बहनें, भाभियां लकी को एैसे तैयार करने में लगी थी जैसे ईद के मौके पर कसाई बकरे को तैयार करता है।

सभी घरवालों को अब केवल पंडित जी के आने का इंतजार था, फोटोग्राफर अपने कैमरों के तारों का जाल पुरे घर में बिछा चुका था, जिनमें उलझ उलझ के बच्चे एैसे गिर रहे थे जैसे शिल्पा शेट्टी कि जुल्फों में कलमाड़ी उलझे थे।

तकरीबन एक घण्टे बाद पंड़ित जी सर में चोटी और हाथ में लंगोटी लिये पधारे। करीब 1 दर्जन श्लोक, 3 किलो फल, 2 किलो देशी घी और 5100/- रूपये नगद के बाद पंडित जी ने लकी के सर पे सेहरा सजाने की अनुमति दी। लकी, जो कि सेहरे से काफी नाखुश था. उसके 800 रुपये जो उसने हजाम को अपने बाल इंद्रधनुषिय बनवाने के लिये दिये थे सेहरे कि वजह से Waste जो हो गये थे।

जैसे कि पहले से तय किया गया था, बारात को तीन हिस्सों मे विभाजित किया गया, अमिर रिश्तोदारों के लिये AC कार, मिडिल क्लास के लिये Non AC कार और गरिबों के लिये…बस। आखिरकार जैसे तैसे बारात रवाना हुई।

लगभग 6 घण्टों के सफर के बाद बारात लकी के ससुराल जा पहुंची जहां उनको पहले से तय होटल मेँ रुकवाया गया।

कुछ देर बाद, आधे बाराती अपने कमरों में पंखे और कुलर न चलने की शिकायत कर रहे थे और बाकी के आधे बाथरुम में पानी न होने की, ये वही लोग थे जो अपने घरों में हर महिने के आखिरी आईतवार को ही नहाते थे। दुसरी तरफ एक सज्जन अपना चौथा काफि का कप गटकाते हुए लड़की वालों कि ओर से कि गयी “अव्यवस्था” का बखान कर रहे थे।

कुछ बाराती इन सब बातोँ से अनजान, नहाने के साबुन और नारियल तेल कि बोतलें अपने झोलों मे भरने मेँ मशगुल थे।

करिब चार घण्टों कि लीपा‍‍‌पोती के बाद लकी कि दैत्यकाय आंटियां भी तैयार हो कर अपने कोप भवन से बाहर आयीं। गहने इतने कि बप्पी दा भी शर्मा जाये, सैण्डिल की हिल टाईगर हिल से भी उंची नजर आ रही थी और पैरों से निचे लटकते लहंगे नगरपालिका के सफाई कर्मचारीयों का काम आसान कर रहे थे।

जैसे तैसे सब लोग खाने के पण्डाल में पहुंचे। सुट पहने कुछ सज्जन खाने के ढ़क्कन खुलने का इतनी बैचेनी से इंतजार कर रहे थे जितनी बैचेनी से राहुल गांधी अपने प्रधानमंत्री बनने का कर रहे हैं। ढ़क्कन खुलते ही सुटेड बुटेड सज्जन खाने पे एैसे टुट पड़े जैसे इमरान हाश्मी किसी नयी नवेली नायिका पे टुटते हैं। आंटियां खाना खाने से ज्यादा भाव खाने में व्यस्त थी।

भरपेट खाना खाने के बाद और खाने मेँ खोट निकालने के बाद बारात लड़की वालों के घर की तरफ रवाना हुई, इस बार बैण्ड बाजे के साथ।

नशे में धुत बाराती सड़क पे एैसे नाच रहे थे कि देखने वालों का डांस पर से विश्वास उठ जाये, कुछ पटाखे फोडने मे मशरुफ थे तो कुछ पटाखे देखने में, बैण्ड वाला गाने एैसे बदल रहा था जैसे मुलायम सिंह यादव पाला बदलते हैं। वहीं लकी के दादजी जो की सबको “शादी का मुहुर्त निकला जा रहा है” बोल बोल के जल्दी आगे बढ़ने के लिये कह रहे थे, कि हालत वैसी ही थी जैसी भारतीय जनता पार्टी में लाल कर्ष्ण आड़वाणी की है।

नाचते नाचते बारात लड़की के घर के सामने पहुंची, जहां लकी की सालियां उससे रिबीन कटवाने के लिये सज धज कर खड़ी थी। लकी और लकी के पापा दोनों काफी आतुर थे, लकी रिबीन काटने के लिये और उसके पापा अपने होने वाले समधि की जेब काटने के लिये।

आग्नि के चारों और चक्कर लगाता लकी बहुत खुश नजर आ रहा था, शायद बेचारा इस बात से अनजान था कि अब ताजिंदगी उसे अपनी पत्नी के चारों और चक्कर लगाने पडेंगे। शायद ये भी पता ना था की पत्नी कि मांग भरना जितना आसान है, उसकी मांग पूरी करना उतना ही मुश्किल।